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काशी में गंगा उफान पर, विश्वनाथ मंदिर का गंगा द्वार बंद, मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट की छतों व गलियों में हो रहा है अंतिम संस्कार

By santosh singh 
Updated Date

वाराणसी। यूपी में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। राज्य के 13 जिलों के 173 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं, जिससे 84 हजार से ज्यादा आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हुई है। गंगा, यमुना, सरयू, घाघरा और मंदाकिनी जैसी प्रमुख नदियां उफान पर हैं और कई इलाकों में जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है।

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​वाराणसी: छतों पर अंतिम संस्कार और बदली आरती की जगह धार्मिक नगरी वाराणसी (काशी) में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। प्रसिद्ध श्री काशी विश्वनाथ मंदिर का गंगा द्वार एहतियातन बंद कर दिया गया है। ऐतिहासिक मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के शवदाह स्थल जलमग्न हो जाने के कारण मणिकर्णिका घाट पर आसपास के भवनों की छतों पर अंतिम संस्कार किया जा रहा है, जबकि हरिश्चंद्र घाट (Harishchandra Ghats) पर सीढ़ियों और संकरी गलियों में अंतिम संस्कार करने की नौबत आ गई है। प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट पर होने वाली गंगा आरती (Ganga Aarti) का स्थान भी सुरक्षित न रहने के कारण इसे गंगा सेवा निधि कार्यालय की छत पर स्थानांतरित कर दिया गया है।

​प्रयागराज: 24 से 48 घंटे में पानी निकालने का सख्त आदेश ​प्रयागराज में बीते कई दिनों से जारी बारिश के कारण निचले रिहायशी इलाकों जैसे दारागंज, करेली, अल्लापुर और सलोरी में 3-3 फीट तक पानी भर गया है। करीब 6,000 से अधिक मकान जलमग्न हैं और 7,000 से ज्यादा परिवार छतों पर रहने को मजबूर हैं। छात्रों के हॉस्टलों में पानी घुसने के कारण 2,000 से अधिक विद्यार्थी सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर चुके हैं।

​इस गंभीर स्थिति पर संज्ञान लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है और जिलाधिकारी को 24 से 48 घंटे के भीतर शहरी इलाकों से जल निकासी सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश दिया है। जलभराव के चलते जिला प्रशासन ने 12वीं तक के सभी स्कूलों को बंद रखने का आदेश जारी किया है।

​सड़कों पर नावें और बांधों से पानी छोड़ने की स्थिति ​चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के उफान पर होने से बाढ़ का पानी सड़कों तक आ गया है, जहां लोग आवागमन के लिए नावों का उपयोग कर रहे हैं। सोनभद्र में लगातार जलस्तर बढ़ने के कारण कनहर बांध के सभी 14 फाटकों को खोलकर पानी की आवक को नियंत्रित किया गया। वहीं, लखीमपुर खीरी के एक प्राथमिक विद्यालय में जलभराव के बीच 5 फीट लंबा कोबरा घुसने से हड़कंप मच गया।

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प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी नदियां विकराल रूप धारण कर चुकी हैं। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी, अयोध्या में सरयू नदी और गोंडा में घाघरा नदी खतरे के निशान को पार कर गई हैं। चित्रकूट में स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि नदियों का पानी सड़कों पर आ गया है और लोग आवागमन के लिए नावों का सहारा ले रहे हैं।

सोनभद्र जिले में इस मानसून सीजन में पहली बार कनहर बांध के सभी 14 फाटकों को एक साथ खोलना पड़ा ताकि बढ़ते जलस्तर को नियंत्रित किया जा सके। वहीं लखीमपुर खीरी के एक प्राथमिक विद्यालय में जलभराव के दौरान 5 फीट लंबा कोबरा सांप घुस आया, जिससे स्कूल में हड़कंप मच गया।

​प्रशासन की व्यवस्था और चेतावनी

​राज्य सरकार ने बाढ़ से निपटने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। प्रदेशभर में 1,589 बाढ़ चौकियां और 1,263 शेल्टर कैंप तैयार किए गए हैं। राहत एवं बचाव अभियानों के लिए 400 से अधिक नावें, मोटरबोट और 1,100 से अधिक गोताखोर तैनात किए गए हैं। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक कई जिलों में मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी जारी रखते हुए लोगों को नदियों से दूर रहने की सलाह दी है।

रिपोर्ट: दीपांजली मिश्रा

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