नई दिल्ली। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने तीन मई को हुई NEET परीक्षा को रद्द कर दिया है। पेपर लीक होने के आरोपों के बीच ये फैसला लिया गया है। सीबीआई को मामले की जांच का आदेश दिया गया है। इस परीक्षा में 22.79 लाख छात्र शामिल हुए थे। वहीं, जल्द ही नई परीक्षा के एलान का दावा किया गया है। इसको लेकर राहुल गांधी की तरफ से लगातार सरकार पर निशाना साधा जा रहा है। उन्होंने कहा कि, प्रधानमंत्री का तथाकथित अमृतकाल, देश के लिए विषकाल बन गया है।
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राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, NEET 2026 की परीक्षा रद्द हो गयी। 22 लाख से ज़्यादा छात्रों की मेहनत, त्याग और सपनों को इस भ्रष्ट भाजपाई व्यवस्था ने कुचल दिया। किसी पिता ने कर्ज़ लिया, किसी माँ ने गहने बेचे, लाखों बच्चों ने रात-रात भर जागकर पढ़ाई की…
और बदले में मिला, पेपर लीक, सरकारी लापरवाही और शिक्षा में संगठित भ्रष्टाचार।
NEET 2026 की परीक्षा रद्द हो गयी।
22 लाख से ज़्यादा छात्रों की मेहनत, त्याग और सपनों को इस भ्रष्ट भाजपाई व्यवस्था ने कुचल दिया।
किसी पिता ने कर्ज़ लिया,
किसी माँ ने गहने बेचे,
लाखों बच्चों ने रात-रात भर जागकर पढ़ाई की,पढ़ें :- UP MLC Election : भाजपा में बगावत, MLC देवेंद्र प्रताप सिंह, बोले- शिक्षकों को धमका रहे हैं अफसर, ये बर्दाश्त नहीं...
और बदले में मिला, पेपर लीक, सरकारी लापरवाही और शिक्षा में…
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) May 12, 2026
उन्होंने आगे लिखा, यह सिर्फ़ नाकामी नहीं, युवाओं के भविष्य के साथ अपराध है। हर बार पेपर माफिया बच निकलते हैं और ईमानदार छात्र सज़ा भुगतते हैं। अब लाखों छात्र फिर से वही मानसिक तनाव, आर्थिक बोझ और अनिश्चितता झेलेंगे। अगर अपनी तकदीर परिश्रम से नहीं, पैसे और पहुँच से तय होगा, तो फिर शिक्षा का मतलब क्या रह जाएगा? प्रधानमंत्री का तथाकथित अमृतकाल, देश के लिए विषकाल बन गया है।
इससे पहले राहुल गांधी ने कहा था कि, NEET 2026 के पेपर लीक की खबर सुनी। परीक्षा नहीं – NEET अब नीलामी है। कई सवाल परीक्षा से 42 घंटे पहले WhatsApp पर बिक रहे थे। 22 लाख से ज़्यादा बच्चे साल भर रात-रात भर आँखें जलाकर पढ़ते रहे और एक रात में उनका भविष्य बाज़ार में सरेआम नीलाम हो गया। यह पहली बार नहीं है। 10 साल में 89 पेपर लीक – 48 बार दोबारा परीक्षा। हर बार वही वादे, और फिर वही ख़ामोशी।
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उन्होंने आगे लिखा था कि, मोदी जी, जब आप अपनी हर नाकामी का बिल जनता पर डालते हैं, तो ग़रीब के बच्चों का भविष्य भी उसी बिल में आता है। 22 लाख बच्चों का भरोसा टूटा है। और मोदी सरकार से बड़ा ख़तरा भारत के युवाओं के सपनों के लिए कोई नहीं। मैं भारत के युवा के साथ हूँ। यह वक़्त बेहद मुश्किल है-मैं जानता हूँ। लेकिन यह व्यवस्था ऐसे नहीं रहेगी। हम मिलकर इसे बदलेंगे।