नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को अहम निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग (Election Commission) से कहा है कि न्यायिक अधिकारियों को अपना काम सुचारू रूप से करने के लिए उचित और निर्बाध परिस्थितियां उपलब्ध कराई जाएं।
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तीन जजों की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस आर. महादेवन और जस्टिस जॉयमाल्या बागची शामिल थे, ने कहा कि SIR प्रक्रिया में तैनात न्यायिक अधिकारियों ने अब तक मतदाता सूची से हटाए जाने के खतरे का सामना कर रहे लोगों की 10.16 लाख आपत्तियों और दावों पर सुनवाई की है।
कोर्ट ने क्या-क्या दिए निर्देश?
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने चुनाव आयोग (Election Commission) से कहा कि SIR प्रक्रिया में कोई भी नया अनिवार्य कदम तब तक लागू न किया जाए, जब तक उसे कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) के मुख्य न्यायाधीश की मंजूरी न मिल जाए। साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि चुनाव आयोग (Election Commission) के पोर्टल में आने वाली तकनीकी दिक्कतों को तुरंत दूर किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि आगे ऐसी समस्याएं न हों।
कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायिक अधिकारियों के लिए नए लॉग-इन आईडी जल्द बनाए जाएं, ताकि मतदाता सूची के संशोधन का काम बिना बाधा जारी रह सके। साथ ही स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारियों के फैसलों की समीक्षा चुनाव आयोग (Election Commission) के किसी प्रशासनिक अधिकारी द्वारा नहीं की जा सकती।
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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट (Election Commission) के मुख्य न्यायाधीश अपीलों की सुनवाई के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की एक पीठ गठित कर सकते हैं। अदालत ने चुनाव आयोग (Election Commission) को इस संबंध में अपीलीय प्राधिकरण बनाने के लिए अधिसूचना जारी करने का भी निर्देश दिया। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) यह सुनवाई पश्चिम बंगाल में जारी SIR प्रक्रिया से जुड़े कई याचिकाओं के समूह पर कर रहा था।