केशव प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग की SIR की समूची प्रक्रिया को जायज व संवैधानिक ठहराना एक ऐतिहासिक फैसला है। इस फैसले से चुनाव आयोग पर उंगली उठाने वालों को करारा जवाब मिला है। राहुल गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी और तेजस्वी यादव समेत बाकी विपक्षी नेताओं को जनता और चुनाव आयोग से माफी मांगनी चाहिए।
लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चुनाव आयोग के SIR पर बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) यानी विशेष सघन पुनरीक्षण अभियान को पूरी तरह से वैध ठहराया है। अब इसको लेकर भाजपा नेताओं की तरफ से विपक्षी दल के नेताओं को घेरा जा रहा है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि, राहुल गांधी, अखिलेश यादव समेत अन्य नेताओं को जनता और चुनाव आयोग से माफी मांगनी चाहिए।
केशव प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग की SIR की समूची प्रक्रिया को जायज व संवैधानिक ठहराना एक ऐतिहासिक फैसला है। इस फैसले से चुनाव आयोग पर उंगली उठाने वालों को करारा जवाब मिला है। राहुल गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी और तेजस्वी यादव समेत बाकी विपक्षी नेताओं को जनता और चुनाव आयोग से माफी मांगनी चाहिए।
इन नेताओं ने लगातार चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को कटघरे में खड़ा करने का कुत्सित प्रयास किया है। इससे न केवल चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा को धक्का लगा, बल्कि जनता के मानस में लोकतंत्र को लेकर भ्रम फैलाने का पाप किया।
सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग की SIR की समूची प्रक्रिया को जायज व संवैधानिक ठहराना एक ऐतिहासिक फैसला है। इस फैसले से चुनाव आयोग पर उंगली उठाने वालों को करारा जवाब मिला है। श्री राहुल गांधी, श्री अखिलेश यादव, सुश्री ममता बनर्जी और श्री तेजस्वी यादव समेत बाकी विपक्षी नेताओं को जनता…
— Keshav Prasad Maurya (@kpmaurya1) May 27, 2026
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उन्होंने आगे लिखा, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण ‘स्वस्थ लोकतंत्र’ के लिए बेहद जरूरी है। इसलिए विपक्ष को इस मामले में अपनी तुच्छ राजनीति से बाज आना चाहिए और तुष्टीकरण से ऊपर उठकर लोकतंत्र और राष्ट्रहित के सम्मान की शपथ लेनी चाहिए।
बता दें कि, बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के अधिकारों को लेकर एक अहम फैसला सुनाया। अदालत ने बिहार समेत कई राज्यों में चल रहे वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) यानी विशेष सघन पुनरीक्षण अभियान को पूरी तरह से वैध ठहराया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि चुनाव आयोग को नागरिकता की जांच करने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार सिर्फ वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने या काटने तक ही सीमित रहेगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता सूची से नाम कट जाने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि कोई व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं रहा।