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ट्रंप ने पोप लियो से नहीं मांगी माफी, कहा- 42 हजार निर्दोष लोगों को मार डाला, धर्म गुरु ने किया पलटवार

By Satish Singh 
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नई दिल्ली। अपने मुख्य ईसाई वोटर बेस से कड़ी आलोचना का सामना करने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पोप लियो XIV पर एक और हमला किया। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने 42 हजार से ज़्यादा निहत्थे प्रदर्शनकारियों को मार डाला है। यह बात उन्होंने तब कही जब पोप ने ईरान के साथ चल रहे विवाद पर बातचीत करने की अपील की थी। ट्रंप ने फिर दोहराया कि अमेरिका के लिए यह बिल्कुल भी मंज़ूर नहीं है कि ईरान के पास परमाणु बम हो। ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि क्या कोई कृपया पोप लियो को बताएगा कि ईरान ने पिछले दो महीनों में कम से कम 42 हजार बेकसूर और निहत्थे प्रदर्शनकारियों को मार डाला है। इसके साथ ही उन्होने कहा कि ईरान के पास परमाणु बम होना बिल्कुल भी मंज़ूर नहीं है। इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद।

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इससे पहले, ट्रंप ने ईरान और घरेलू मुद्दों पर पोप के रुख की सार्वजनिक आलोचना करने के बाद पोप लियो XIV से माफ़ी मांगने से इनकार कर दिया था। ट्रंप ने पोप लियो के रुख को गलत बताया और संकेत दिया कि पोप उनके प्रशासन की नीतियों के नतीजों से नाखुश होंगे, जिससे राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव और बढ़ गया। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि मैं पोप लियो से माफ़ी नहीं मांगूंगा। मुझे लगता है कि वह अपराध और दूसरी चीज़ों के मामले में बहुत कमज़ोर हैं। सोमवार को इन उकसावों का जवाब देते हुए पोप लियो XIV ने राजनीतिक टकराव के बजाय आध्यात्मिक वकालत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर ज़ोर दिया और कहा कि उनकी अमेरिकी प्रशासन के साथ किसी भी तरह के टकराव में पड़ने की कोई इच्छा नहीं है। अल्जीरिया जाते समय विमान में पत्रकारों द्वारा पूछे जाने पर पोप ने कहा कि मुझे लगता है कि जो लोग पढ़ते हैं वे खुद ही अपने निष्कर्ष निकाल लेंगे। मैं कोई राजनेता नहीं हूं मेरा डोनाल्ड ट्रंप के साथ किसी भी बहस में पड़ने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने वैश्विक सद्भाव पर ध्यान केंद्रित करने के अपने संकल्प को और मज़बूती से दोहराया और कहा कि इसके बजाय आइए हम हमेशा शांति की तलाश करें और युद्धों को खत्म करें। मैं ट्रंप प्रशासन से नहीं डरता। पोप ने इस बात पर ज़ोर दिया कि उनका संदेश राजनीति के बजाय आस्था पर आधारित है और चेतावनी दी कि सुसमाचार (Gospel) का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए गलत इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

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