गांधीनगर। गुजरात की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार ने विधानसभा में ‘समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक 2026’ पेश कर दिया है, जिसका उद्देश्य शादी, तलाक और विरासत जैसे मामलों में सभी धर्मों के लिए एक समान कानून लागू करना है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने यह बिल विधानसभा में पेश किया। अगर यह विधेयक पारित हो जाता है, तो गुजरात, उत्तराखंड के बाद UCC लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन जाएगा। गौरतलब है कि उत्तराखंड ने फरवरी 2024 में यह कानून पास किया था।
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‘गुजरात समान नागरिक संहिता, 2026’ पूरे राज्य में लागू होगा, यहां तक कि राज्य से बाहर रहने वाले गुजरातियों पर भी इसका असर पड़ेगा। हालांकि, अनुसूचित जनजातियों और कुछ पारंपरिक अधिकार वाले समूहों को इस कानून से बाहर रखा गया है। बिल की अहम बातों में बहुविवाह पर रोक और लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन शामिल है। प्रस्ताव के मुताबिक, शादी तभी मान्य होगी जब दोनों में से किसी का भी कोई जीवित जीवनसाथी न हो। साथ ही, लिव-इन संबंधों को भी कानूनी दायरे में लाने के लिए उनके रजिस्ट्रेशन और समाप्ति की प्रक्रिया तय की गई है। इस विधेयक को लागू करने से पहले राज्य सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट भी सौंप दी है, जिसके आधार पर यह बिल तैयार किया गया है।
हालांकि, बिल पेश होते ही विरोध भी शुरू हो गया है। अहमदाबाद के लाल दरवाजा इलाके में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया, जहां कई लोगों को हिरासत में लिया गया। इसके अलावा AIMIM ने भी इस विधेयक का विरोध किया है। सरकार जहां इसे समानता और एकरूपता की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष और कुछ संगठन इसे लेकर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्माने की संभावना है।