नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन के व्यक्तित्व अधिकार (Personality Rights) से जुड़े मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति के नाम, तस्वीर, आवाज या पहचान का इस्तेमाल करना अपने आप में गैरकानूनी नहीं है। इसके लिए यह देखना जरूरी है कि इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया है और उससे संबंधित व्यक्ति के किन अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि व्यक्तित्व अधिकार केवल फिल्मी सितारों या मशहूर हस्तियों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि हर व्यक्ति को अपनी पहचान की सुरक्षा का अधिकार है।
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क्या है पूरा मामला?
आपको बता दें कि कृति सेनन ने अपनी पहचान के कथित दुरुपयोग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अभिनेत्री ने आरोप लगाया था कि कई लोग और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उनकी तस्वीरों, नाम और आवाज का उनके बिना अनुमति इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट बनाना, AI की मदद से आपत्तिजनक और अश्लील तस्वीरें-वीडियो तैयार करना, उनकी आवाज की नकल करने वाले मॉडल और चैटबॉट बनाना तथा उनके नाम पर मर्चेंडाइज बेचना जैसी गतिविधियां भी शामिल थीं।
29 अक्टूबर 2026 को इस मामले में जस्टिस पुरुषैंद्र कुमार कौरव ने अंतरिम आदेश जारी किया। संबंधित पक्षों को अदालत ने कृति सेनन की पहचान का इस्तेमाल करके भ्रामक, अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री बनाने या प्रसारित करने से रोकने के निर्देश दिए। इसके साथ ही चिह्नित आपत्तिजनक URL को हटाने और संबंधित वेबसाइटों को ब्लॉक करने के निर्देश भी दिए गए।
अदालत ने पर्सनालिटी राइट्स को कैसे समझाया?
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हाईकोर्ट के अनुसार, पर्सनालिटी राइट्स यानी व्यक्तित्व अधिकार कोई एक अकेला कानूनी अधिकार नहीं है। इसमें कई अलग-अलग अधिकार शामिल होते हैं। इनमें मुख्य रूप से राइट ऑफ पब्लिसिटी, राइट टू प्राइवेसी, पासिंग ऑफ और मानहानि का अधिकार शामिल हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि इन सभी अधिकारों को एक साथ जोड़कर हर तरह के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग नहीं की जा सकती। हर मामले में यह देखना होगा कि वास्तव में किस अधिकार का उल्लंघन हुआ है।
न्यूज, मीम्स और आलोचना पर नहीं लगेगी रोक
इस मामले में अदालत की एक महत्वपूर्ण टिप्पणी यह भी रही कि उसके आदेश से न्यूज रिपोर्टिंग, रिव्यू, आलोचना, टिप्पणी, व्यंग्य, पैरोडी, कैरिकेचर और सामान्य फैन एक्सप्रेशन पर रोक नहीं लगाई जाएगी, बशर्ते वे प्रतिबंधित सामग्री की श्रेणी में न आते हों। साथ ही अदालत ने साफ किया कि किसी कलाकार की लोकप्रियता का मतलब यह नहीं है कि उसकी तस्वीर या नाम का हर इस्तेमाल गैरकानूनी हो जाएगा। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्ति की निजता एवं पहचान के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।
10 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल उसकी टिप्पणियां प्रथम दृष्टया विचार हैं और मामले के सभी पक्षों को सुनने के बाद कानूनी सवालों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। बता दें कि इस मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर 2026 को निर्धारित की गई है। इस तरह कृति सेनन का मामला सिर्फ एक अभिनेत्री की पहचान की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि AI डीपफेक, डिजिटल पहचान, निजता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर भी काफी अहम बन गया है।