लखनऊ। उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग NRHM के आरोपी और दवा माफिया मुकेश श्रीवास्तव के कब्जे में है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक की मेहरबानी से ये सब चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के हर छोटे—बड़े काम में मुकेश श्रीवास्तव का दखल रहता है। कोई अफसर भी उसके काम में अड़चन नहीं पैदा कर सकता। लिहाजा, वो अपने मंसूबों में आसानी से सफल हो जाता है। बीते साल झांसी मेडिकल कॉलेज में हुए अग्निकांड के बाद प्रदेश भर के सभी अस्पतालों में फायर सेफ्टी और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी आडिट कराए गए और तत्काल कमियों को दूर करने के निर्देश दिए गए थे।
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इसके बाद प्रदेश के ज्यादातर अस्पतालों में फायर सेफ्टी और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी के काम युद्धस्तर पर कराए गए। इस काम को कराने के लिए मुकेश श्रीवास्तव और उससे जुड़ी हुई फर्मों को स्वास्थ्य विभाग ने चुना। लिहाजा, मुकेश श्रीवास्तव और उससे जुड़ी हुई फर्मों ने नियमों की अनदेखी कर अस्पतालों में फायर सेफ्टी और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी का काम किए। सूत्रों की माने तो दवा माफिया और उससे जुड़ी हुई फर्मों को 35 से 40 जिलों का काम दिया गया था।
करीब डेढ़ सौ करोड़ का होने जा रहा है भुगतान
फायर सेफ्टी और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी का काम मनमाने तरीके से करने वाली मुकेश श्रीवास्तव और उससे जुड़ी हुई फर्मों को जल्द ही डेढ़ सौ करोड़ से ज्यादा का भुगतान दिया जाना है। सूत्रों की माने तो विभाग के पास बजट आते ही सबसे पहले मुकेश और उससे जुड़ी हुई फर्मों को भुगतान दिया जाएगा। हालांकि, उनके द्वारा फायर सेफ्टी और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी के नाम पर किए गए कामों का कोई भी अडिट नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि, वो अपने मनमाने तरीके से इसका काम किए हैं, जिसमें ज्यादातर उपकरण नियमों के अनदेखी कर लगाए गए हैं।
बोगस बिल के जरिए मुकेश कर रहा बड़ा खेल
सूत्रों की माने तो मुकेश श्रीवास्तव बोगस बिल के जरिए स्वास्थ्य विभाग में बड़ा खेल कर रहा है। इसकी जानकारी विभाग के मंत्री और कई अफसरों को भी है लेकिन सब खामोश बने हुए हैं। दरअसल, लंबे समय से मुकेश स्वास्थ्य विभाग में अपने मनमाने तरीके से काम कर रहा है। सीएमओ की ट्रांसफर—पोस्टिंग से लेकर दवा की खरीद फरोख्त तक में उसका बड़ा हाथ होता है। इसके एवज में वो अफसरों और कई अन्य विभाग से संबंधित लोगों को मोटी रकम भी पहुंचाता है।
मुकेश की कई करतूतें हुईं हैं उजागर
मुकेश और उससे जुड़ी हुई फर्मों की कई करतूतें पर्दाफाश न्यूज उजागर कर चुका है। मुकेश श्रीवास्वत सीएमओ की ट्रांसफर पोस्टिंग से लेकर दवाओं की खरीद फरोख्त में कैसे खेल करता है इसकी जानकारी विभाग के मंत्री से लेकर प्रमुख सचिव तक है। इसके बाद भी विभाग मुकेश और उससे जुड़ी हुई फर्मों पर मेहरबान है। सबसे अहम बात ये है कि, यूपी के स्वास्थ्य विभाग में मुकेश श्रीवास्तव का एकतरफा राज है।
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