डिजिटल, पर्दाफाश। नई दिल्ली के भारत मंडपम में गुरुवार को संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC की स्थापना के 100 साल पूरे होने पर शताब्दी समारोह आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कार्यक्रम में पहुंचे और इस दौरान उन्होंने सिविल सेवा में आने वाले युवाओं की सोच और जिम्मेदारी को लेकर अपनी बात रखी। पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए जिस तरह की प्रशासनिक व्यवस्था की जरूरत है, उसमें UPSC की भूमिका बेहद अहम है। उनके मुताबिक आयोग से चयनित होने वाले युवाओं में दो बातें प्रमुख रूप से होनी चाहिए- नेशन फर्स्ट और सिटिजंस फर्स्ट।
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UPSC के इतिहास पर किताब, सिक्का और डाक टिकट जारी
शताब्दी समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने UPSC से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों पर तैयार की गई किताब का लोकार्पण किया। इसके अलावा आयोग के 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट भी जारी किया गया। आधिकारिक कार्यक्रम के मुताबिक यह समारोह 1926 में आयोग की स्थापना के 100 साल पूरे होने के अवसर पर हो रहा है। UPSC की शुरुआत 1 अक्टूबर 1926 को हुई थी। इसके पहले अध्यक्ष सर रॉस बार्कर थे। बाद में संवैधानिक व्यवस्था के तहत आयोग को मौजूदा स्वरूप मिला।
फ्लाईदुबई के पायलट स्मित मच्छार का भी किया जिक्र
मोदी ने अपने संबोधन में फ्लाईदुबई के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी का भी उल्लेख किया। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट में हुई घटना के दौरान मच्छार ने मुश्किल हालात में सूझबूझ दिखाई और बड़ी विमानन त्रासदी को टालने में भूमिका निभाई। घटना के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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पीएम मोदी ने बताया कि उन्होंने स्मित के माता-पिता और परिवार से बातचीत की है। उन्होंने पायलट के साहस की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयास से 9/11 जैसी बड़ी त्रासदी टलने की स्थिति बनी।
हर साल सैकड़ों भर्ती प्रक्रियाएं
UPSC केंद्र सरकार की विभिन्न सेवाओं के लिए हर साल बड़ी संख्या में भर्ती परीक्षाएं और चयन प्रक्रियाएं आयोजित करता है। आयोग अब अपनी अगली सदी में भर्ती प्रक्रिया को और आधुनिक बनाने, तकनीक के इस्तेमाल तथा उम्मीदवारों के निर्णय लेने की क्षमता पर जोर देने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा कर रहा है।