प्रयागराज। यूपी के प्रयागराज जिले बीते रविवार को परेड ग्राउंड में प्रबुद्ध महाकुम्भ में विकसित यूपी क़ी बैठक में हिस्सा लेने यूपी उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या पहुंचे थे। इसी दौरान रोहित तिवारी काका नाम के एक युवा ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) से सिर्फ इतना पूछ लिया कि सर UGC के नए नियमों और आरक्षण पर आपका क्या स्टैंड है? इस सवाल से आग बबूला भाजपा पार्षद विनय मिश्रा उर्फ सिंटू (BJP Councilor Vinay Mishra alias Sintu) द्वारा युवक को थप्पड़ मारे जाने का आरोप है। अब इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल है।
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क्या अब भारत के लोकतंत्र में सत्ता से सवाल पूछना भी अपराध हो गया है? क्या संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अब सत्ताधारी दल की अनुमति से चलेगी?
प्रयागराज में परशुराम सेना द्वारा आयोजित कार्यक्रम में, जिसमें उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को आमंत्रित किया गया था, रोहित तिवारी सहित सामान्य वर्ग के पाँच युवाओं के साथ कथित मारपीट, गाली-गलौज और पुलिस द्वारा गिरफ्तारी की घटना लोकतंत्र के माथे पर कलंक है। आरोप है कि इन युवाओं का अपराध केवल इतना था कि उन्होंने UGC बिल को लेकर सवाल उठाने का साहस किया। यदि सत्ता के किसी प्रतिनिधि से सवाल पूछने पर युवाओं को पीटा जाए, उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाए और फिर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए, तो यह कानून का शासन नहीं, बल्कि सत्ता के अहंकार का प्रदर्शन है!
याद रखिए, भारत किसी राजनीतिक दल की जागीर नहीं है और न ही कोई नेता लोकतंत्र में सवालों से ऊपर है! संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है। सत्ता में बैठे लोगों से असहमति जताना, नीतियों पर सवाल उठाना और अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है, कोई अपराध नहीं। यदि इन युवाओं ने कानून का उल्लंघन नहीं किया, तो उनके विरुद्ध कार्रवाई किस आधार पर की गई? क्या उत्तर प्रदेश में अब लोकतंत्र की जगह राजनीतिक दबदबा चलेगा? क्या सामान्य वर्ग के युवाओं को केवल इसलिए प्रताड़ित किया जाएगा कि उन्होंने सत्ता से जवाब माँग लिया?
यह केवल पाँच युवाओं का मामला नहीं है; यह हर उस भारतीय के अधिकार का प्रश्न है जो सरकार से सवाल पूछने का साहस रखता है। किसी भी राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है और पुलिस को भी किसी राजनीतिक दबाव में नागरिकों के मौलिक अधिकारों को कुचलने का लाइसेंस नहीं मिला है।
जो सरकार सवाल पूछने वाले युवाओं की आवाज़ दबाने लगे, उसे याद रखना चाहिए कि लोकतंत्र में जनता शासकों की प्रजा नहीं, बल्कि संप्रभुता का स्रोत है। सवाल पूछना हमारा अधिकार है, सत्ता की चापलूसी करना हमारी मजबूरी नहीं! लोकतंत्र में जवाब देना सरकार का कर्तव्य है और सवाल पूछना नागरिक का अधिकार!— Adv. Anil Mishra (@Adv_Anil_Mishra) November 2, 2026
क्या लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछना अपराध है?
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सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि मैं सत्ता में बैठी भाजपा से पूछना चाहता हूं,क्या लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछना अपराध है? अगर देश का नागरिक अपने अधिकार और मुद्दों पर सवाल पूछेगा, तो क्या आप उसे थप्पड़ मरवाएंगे? सवाल का जवाब तर्क से दिया जाता है, हिंसा से नहीं।
प्रयागराज में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य जी से UGC के मुद्दे पर सवाल पूछने पर भाजपा पार्षद द्वारा युवा रोहित तिवारी को थप्पड़ मारा गया।
मैं सत्ता में बैठी भाजपा से पूछना चाहता हूँ—क्या लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछना अपराध है? अगर देश का नागरिक अपने अधिकार और मुद्दों पर सवाल पूछेगा, तो क्या आप उसे थप्पड़ मरवाएंगे?
सवाल का जवाब तर्क से दिया जाता है, हिंसा से नहीं।
@kpmaurya1 @BJP4India @narendramodi @AmitShah @myogiadityanath— Sarvesh Pandey (@SawarnArmychief) November 2, 2026
सवाल पूछने पर थप्पड़.? क्या यही है लोकतंत्र
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यूजर्स का कहना है कि सवालों का जवाब थप्पड़ से देना सत्ता के अहंकार को दर्शाता है, नेतृत्व की मजबूती को नहीं। लोकतंत्र में असहमति और सवालों की जगह होनी चाहिए, डर और हिंसा की नहीं। सत्ता में बैठे लोगों को यह समझना होगा कि जनता सवाल पूछने के लिए है, सिर्फ जयकारे लगाने के लिए नहीं। और हद तो तब हो गई जब पुलिस आई और थप्पड़ मारने वाले को छोड़कर सवाल पूछने वाले रोहित तिवारी को ही पकड़कर गिरफ्तार कर लिया।
एक तरफ इनके नेता ब्राह्मण युवाओं को थप्पड़ जड़ रहे हैं, दूसरी तरफ इन्हें चुनाव के समय ब्राह्मणों से ही वोट भी चाहिए
इस घटना से आग बबूला एक यूजर्स ने एक्स पर लिखा कि सोशल मीडिया पर लिखा कि खूब करो बीजेपी की गुलामी और खूब खाओ बीजेपी के नेताओं से लात और थप्पड़! उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की ‘विकसित यूपी बैठक’ के दौरान UGC और आरक्षण पर सवाल पूछने वाले एक ब्राह्मण युवक को सरेआम थप्पड़ मारने की घटना सामने आई। सवाल पूछे जाने से नाराज होकर वहां मौजूद एक स्थानीय पार्षद/बीजेपी कार्यकर्ता ने ब्राह्मण युवक को सरेआम थप्पड़ जड़ दिया, जिसके बाद कार्यक्रम में माहौल काफी गर्मा गया।
खूब करो बीजेपी की गुलामी और खूब खाओ बीजेपी के नेताओं से लात और थप्पड़!
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की ‘विकसित यूपी बैठक’ के दौरान UGC और आरक्षण पर सवाल पूछने वाले एक ब्राह्मण युवक को सरेआम थप्पड़ मारने की घटना सामने आई।
सवाल पूछे जाने से नाराज होकर वहां मौजूद एक स्थानीय पार्षद/बीजेपी कार्यकर्ता ने ब्राह्मण युवक को सरेआम थप्पड़ जड़ दिया, जिसके बाद कार्यक्रम में माहौल काफी गर्मा गया।
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इन बीजेपी के नेताओं को आखिर शर्म क्यों नहीं आती? एक तरफ इनके नेता ब्राह्मण युवाओं को थप्पड़ जड़ रहे हैं, दूसरी तरफ इन्हें चुनाव के समय ब्राह्मणों से ही वोट भी चाहिए!
जब ब्राह्मण समाज अपने अधिकारों, UGC नियमों और आरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाता है, तब उसे अपमानित किया जाता है। लेकिन जब चुनाव आता है, तब इन्हीं नेताओं को ब्राह्मण समाज का समर्थन और वोट याद आने लगता है।
आखिर कब तक यह दोहरा व्यवहार बर्दाश्त करोगे?
किसी पार्टी का समर्थन करना गलत नहीं है, लेकिन समर्थन के नाम पर अपना स्वाभिमान और अपने बच्चों का भविष्य दांव पर लगाना कहां की समझदारी है?
याद रखिए, लोकतंत्र में जनता मालिक है और नेता जनता के प्रतिनिधि। सवाल पूछने पर थप्पड़ नहीं, जवाब मिलना चाहिए।
ब्राह्मण समाज के भाइयों! अब तय आपको करना है कि आपको अपने अधिकार और सम्मान प्यारे हैं या किसी राजनीतिक पार्टी की गुलामी!
भाजपा की सरकार ब्राह्मणों को काले कानून के तहत जेल भी भेजेगी, सवाल करोगे तो पिटवाएगी भी और वोट नहीं दोगे तो देशद्रोही भी कहलाओगे!
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#BJP #BrahminSamaj
— Shatrudhan Pandey (@Shatrud23678005) November 1, 2026
इन बीजेपी के नेताओं को आखिर शर्म क्यों नहीं आती? एक तरफ इनके नेता ब्राह्मण युवाओं को थप्पड़ जड़ रहे हैं, दूसरी तरफ इन्हें चुनाव के समय ब्राह्मणों से ही वोट भी चाहिए। जब ब्राह्मण समाज अपने अधिकारों, UGC नियमों और आरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाता है, तब उसे अपमानित किया जाता है। लेकिन जब चुनाव आता है, तब इन्हीं नेताओं को ब्राह्मण समाज का समर्थन और वोट याद आने लगता है।
आखिर कब तक यह दोहरा व्यवहार बर्दाश्त करोगे? किसी पार्टी का समर्थन करना गलत नहीं है, लेकिन समर्थन के नाम पर अपना स्वाभिमान और अपने बच्चों का भविष्य दांव पर लगाना कहां की समझदारी है? याद रखिए, लोकतंत्र में जनता मालिक है और नेता जनता के प्रतिनिधि। सवाल पूछने पर थप्पड़ नहीं, जवाब मिलना चाहिए। ब्राह्मण समाज के भाइयों! अब तय आपको करना है कि आपको अपने अधिकार और सम्मान प्यारे हैं या किसी राजनीतिक पार्टी की गुलामी! भाजपा की सरकार ब्राह्मणों को काले कानून के तहत जेल भी भेजेगी, सवाल करोगे तो पिटवाएगी भी और वोट नहीं दोगे तो देशद्रोही भी कहलाओगे!