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हम महिला आरक्षण बिल के खिलाफ नहीं, ये भाजपा की दरार वाली राजनीति का ‘काला दस्तावेज’ था : अखिलेश यादव

By संतोष सिंह 
Updated Date

लखनऊ : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने रविवार को प्रेस कांफ्रेंस कर केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि महिलाएं बीजेपी (BJP)  चाल को समझ चुकी है। ये बीजेपी (BJP) की बदनीयत की हार है। ये नए जमाने की नारी को स्वीकार नहीं करते। संसद में बिल पास नहीं हो पाया है। भाजपाई एक दूसरे को डर दिखाते हैं। लोक सभा चुनाव में प्रदेश ने हराया था। अब महिलाएं इनको हराएंगी। श्री यादव ने कहा कि जागरूक महिलाएं इन्हें वोट नहीं देंगी। टीवी सीरियल देख कर ये सब काम करते हैं। ये महिलाओं का हक मारना चाहते हैं।

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महिला आरक्षण बिल की हार भाजपा की हार है, विपक्ष की एकता ने चटा दी धूल

अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav)  ने कहा कि महिला आरक्षण बिल की हार भाजपा की हार है। विपक्ष की एकता ने धूल चटा दी। तथाकथित महिला आरक्षण बिल फेल। बीजेपी (BJP) की मंशा सही नहीं थी। महिला एकता को बीजेपी तोड़ना चाहती थी। ये 33 फीसदी महिलाओं का हक मार रहे थे। हम महिलाओं के विरोध में नहीं थे। उन्होंने कहा कि ये संशोधन के नाम पर जल्दबाज़ी दिखा रहे थे। भाजपा का ये बहुत बड़ा षडयंत्र था।

अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने कहा कि परिसीमन के नाम पर भी ये बिल रूप बदलकर नारी के अधिकार का हनन करने आया था। ये बिल नहीं था, भाजपा की दरार वाली राजनीति का काला दस्तावेज था। उन्होंने कहा कि ये भाजपा की हार है, भाजपा का हर बिल या तो कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए होता है या समाज को बांटने का छल-छलावा होता है।

महिला आरक्षण बिल भाजपा और उनके संगी-साथियों के नये धोखे का एक ऐसा ‘काला दस्तावेज़’ है

महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है हम लेकिन जो जल्दबाजी है जिस तरह से लाया जा रहा है उसके खिलाफ हैं। जातीय जनगणना होगी तो देश आरक्षण मांगेगा, यह सबसे बचना चाहते हैं। देश में आरक्षण के साथ-साथ संरक्षण की ज्यादा जरूरत है। महिला आरक्षण बिल भाजपा और उनके संगी-साथियों के नये धोखे का एक ऐसा ‘काला दस्तावेज़’ है, जो दरअसल ‘ख़ुफ़िया लोगों की गुप्त योजना’ है। जिसमें पिछड़े-दलित समाज की महिलाओं को हमेशा के लिए कमज़ोर करने की साज़िश है। उन्हें सच्चे जन प्रतिनिधित्व से वंचित रखने का चक्रव्यूह रचा जा रहा है। ये बिल वर्चस्ववादियों की हार की हताशा और उनकी नारी के प्रति शोषणकारी-दमनकारी सांमती सोच से जन्मा है। महिला आरक्षण बिल एक ‘जनविरोधी जुमले’ से अधिक कुछ और नहीं है।

जागरूक महिलाएं इस बार इनके बहकावे-छलावे में नहीं आएंगी

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जागरूक महिलाएं इस बार इनके बहकावे-छलावे में नहीं आएंगी। ये बिल भाजपा की ‘कुटिल राजनीति’ का मुखौटा खींच लेगा। भाजपा का विरोध जितना बढ़ता जाएगा, ऐसे और भी अनेक बिल आएंगे, जिनकी मूल मंशा ‘पीडीए’ की लगातार बढ़ती एकजुटता-एकता को कमज़ोर करने की है और किसी भी तरह से सत्ता में बने रहने की है। भाजपा अपनी एक्सपायरी डेट के अंतिम महीनों में चल रही है।

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