West Bengal Assembly Elections 2026 : राजनीति में हार और जीत दोनों के मायने होते है। बंगाल में भाजपा का कमल खिल गया। पूरे राज्य में भगवा लहराने लगा। इस ऐतिहासिक जीत के पीछे पार्टी संगठन के वो चेहरे लगातार काम करते रहे जो जो सीधे जनता के बीच में नहीं दिखायी देते। बंगाल में भाजपा की इस बड़ी जीत के समय उन महत्व पूर्ण चेहरों पर बात करना लाजमी हो जाता है , जिन्होंने रातदिन एक करके पार्टी के लिए ऐसी रणनीति बनायी जो आज विजय के रूप में दिखायी पड़ रही है। भाजपा संगठन के उन राजनीतिक पंडितों को जानना तब और आवश्यक हो जाता है जब मुकाबला कांटे को हो और दोनों तरफ एक एक वोट का संघर्ष हो।
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बंगाल जीतने के पीछे चुनाव जिताने और विजयी रणनीति में सिद्धहस्त गृह मंत्री अमित शाह की कुशल रणनीति और अनुभव माना जा रहा है। अमित शाह पंद्रह दिनों तक पश्चिम बंगाल में कैंप कर गए। उन्होंने पार्टी संगठन के पदाधिकारियों के साथ तालमेल विठाया और आवश्यक निर्देश दिए। रणनीति को ज़मीन पर उतारने के लिए लगातार संगठन की मीटिंग कीं। वे देर रात तक पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर उन्हें गाइड करते थे और दिन में रैलियों और रोड शो के माध्यम से प्रचार करते थे। उन्होंने प बंगाल में पचास से भी अधिक रैलियां और रोड शो किए। उन्होंने इस दौरान कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं जिनमें सरकार बनने के बाद कर्मचारियों के लिए सातवां वेतन आयोग लागू करना, गुंडों और घुसपैठियों से सख्ती से निपटना शामिल है।
पूरे चुनाव अभियान के मुख्य रणनीतिकार के रूप में काम किया। उन्होंने विभिन्न समुदायों और सामाजिक वर्गों के बीच समन्वय बिठाने का काम किया। उनकी भूमिका मुख्य रूप से केंद्र और राज्य इकाई के बीच एक पुल की तरह थी, जिससे संसाधनों और केंद्रीय नेतृत्व के दौरों का सही प्रबंधन हो सका।
भूपेंद्र यादव ने माइक्रो-मैनेजमेंट पर ध्यान दिया। उन्होंने बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और चुनावी कानूनी पेचीदगियों को संभालने में बड़ी भूमिका निभाई।
सुनील बंसल ने बंगाल में जमीनी स्तर पर ‘पन्ना प्रमुखों’ की फौज खड़ी की। उनका मुख्य ध्यान टीएमसी के ‘कैडर-आधारित’ तंत्र का मुकाबला करने के लिए बीजेपी का अपना एक मजबूत और अनुशासित संगठन तैयार करने पर था।