नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी आज इंदौर दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने दूषित पानी पीने के कारण जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों से मुलाकात की। इसके साथ ही, उन परिजनों की आर्थिक मदद की। राहुल गांधी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की तस्वीर को सोशल मीडिया एक्स पर शेयर करते हुए लिखा कि, BJP की डबल इंजन सरकार का नया स्मार्ट सिटी मॉडल…पानी में ज़हर, हवा में ज़हर, दवा में ज़हर, ज़मीन में ज़हर, और, जवाब मांगो तो चलेगा बुलडोजर!
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उन्होंने आगे लिखा, कुछ इस तरह इस मॉडल में गरीबों की मौतों के लिए कोई भी ज़िम्मेदार नहीं होता। सरकार अभी उनकी लापरवाही से हुई इंदौर की त्रासदी की जवाबदेही ले-दोषियों को सजा और पीड़ितों को अच्छा इलाज और मुआवजा जल्द से जल्द दिलाए। वहीं, राहुल गांधी के इस बयान पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने पलटवार किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, काश आपको उसी मध्य प्रदेश का यूनियन कार्बाइड याद होता? एंडरसन को भगाने का वाक़या जनता को बताते? क्या हो गया आपको कुछ खाते क्यों नहीं?
काश आपको उसी मध्य प्रदेश का यूनियन कार्बाइड याद होता? एंडरसन को भगाने का वाक़या जनता को बताते? क्या हो गया आपको कुछ खाते क्यों नहीं https://t.co/uigpCiwEqK
— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) January 17, 2026
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राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि, भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से जो लोग प्रभावित हुए हैं, मैं उनसे मिला हूं। कई परिवार के सदस्यों की मौत हुई है और कई बीमार हुए हैं। वादा किया गया था-देश को ‘स्मार्ट सिटी’ दी जाएंगी। मगर ये स्मार्ट सिटी का नया मॉडल है, जहां पीने का पानी नहीं है और लोगों को डराया जा रहा है। इंदौर में साफ पानी नहीं मिल रहा है। दूषित पानी पीने से लोगों की मौत हुई है और यह सरकार का ‘अर्बन मॉडल’ है।
यह सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसा अन्य शहरों में भी हो रहा है। लोगों को साफ पानी और हवा मिले, ये जिम्मेदारी सरकार की होती है, मगर वह इस काम में असफल है।सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। साथ ही, पीड़ितों को सही मुआवजा भी मिलना चाहिए, क्योंकि ऐसे हालात सरकार की लापरवाही से बने हैं। आज भी यहां साफ पानी नहीं मिल रहा है। इसलिए लोग चाहते हैं कि यहां साफ पानी की व्यवस्था की जाए। जनता को साफ पानी देना सरकार की जिम्मेदारी है, जिसे पूरा किया जाना चाहिए। नेता विपक्ष होने के नाते मैं इनकी आवाज उठाने आया हूं, ये मेरी जिम्मेदारी है- मैं पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा हूं।