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sawan me nandi puja :  सावन में नंदी पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है ,  जानें नंदी श्लोक

By अनूप कुमार 
Updated Date

sawan me nandi puja: सावन का महीना भगवान महादेव समर्पित है। इस माह पर्यन्त भक्त गण पूरे मनोयोग से शिवपरिवार की पूजा करते हैं ओर शिवालयों में जलाभिषेक करते है। शिवालयों के द्वार पर नंदी महाराज विराजमान होते है। शिव पूजा विधि के अनुसार, नंदी महाराज की भी पूजा विधान है। इसी प्रकार भक्त गण अपनी मानोकामनाएं नंदी महाराज के कानों में कहते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से नंदी महाराज भक्त की सिफारिस महादेव से करते है। और महादेव प्रसन्न हो कर भक्त की मनोकामना पूर्ण होने आर्शिवाद देते हैं।

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साधना का पूर्ण फल
सावन महीने में भगवान शिव के साथ उनके प्रिय वाहन नंदी महाराज की पूजा करने का विशेष विधान और महत्व है। शिव पुराण के अनुसार, शिवजी की पूजा के बाद नंदी की पूजा करने से ही साधना का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

शिवपुराण में नंदी श्लोक
शिवपुराण में भगवान नंदी की स्तुति और उनके स्वरूप का वर्णन करने के लिए नंदी गायत्री मंत्र और प्रमुख श्लोक का उपयोग किया जाता है:
नंदी गायत्री मंत्र (श्लोक)ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, नन्दीकेश्वराय धीमहि, तन्नो वृषभः प्रचोदयात्।

नंदी स्तुति श्लोक
भवेशं भवेशानम ईड्यं सुरेशं विभुं विश्वनाथं भवानीसमार्द्रं श्रच्‍छन्द्र गात्रं सुधापूर्ण नेत्रं भजे नन्दीकेश्वरं दरिद्रार्तिनाशम्॥

नंदी पुरुषार्थ का प्रतीक
शिवजी का वाहन नंदी पुरुषार्थ अर्थात परिश्रम का प्रतीक है। नंदी का एक संदेश यह भी है कि जिस तरह वह भगवान शिव का वाहन है, ठीक उसी तरह हमारा शरीर आत्मा का वाहन है। जैसे नंदी की दृष्टि शिव की ओर होती है, उसी तरह हमारी दृष्टि भी आत्मा की ओर होनी चाहिये। हर व्यक्ति को अपने दोषों को देखना चाहिए। हमेशा दूसरों के लिए अच्छी भावना रखना चाहिए।

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नंदी का संकेत
नंदी यह संकेत देता है कि शरीर का ध्यान आत्मा की ओर होने पर ही हर व्यक्ति चरित्र, आचरण और व्यवहार से पवित्र हो सकता है। इसे ही सामान्य भाषा में मन का स्वच्छ होना कहते हैं। जिससे शरीर भी स्वस्थ होता है और शरीर के निरोग रहने पर ही मन भी शांत, स्थिर और दृढ़ संकल्प से भरा होता है। इस प्रकार संतुलित शरीर और मन ही हर कार्य और लक्ष्य में सफलता के करीब ले जाते हुए मनुष्य अंत में मोक्ष को प्राप्त करता है।

 

 

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