Sambhal Namaz Controversy : संभल जिला प्रशासन ने एक आदेश जारी कर मस्जिद के अंदर नमाज पढ़ने के लिए लोगों की संख्या को कम करने के लिए कहा था। इस आदेश के खिलाफ याचिका दायर पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि अगर संभल के एसपी और डीएम लॉ एंड ऑर्डर बनाए नहीं रख सकते, तो उन्हें या तो इस्तीफा दे देना चाहिए या ट्रांसफर मांग लेना चाहिए।
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जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने कहा कि लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखना राज्य की जिम्मेदारी है और इसके नाम पर लोगों के धार्मिक अधिकारों पर रोक नहीं लगाई जा सकती। अगर संभल के पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी को कानून-व्यवस्था की स्थिति संभालने में कठिनाई महसूस होती है तो उन्हें या तो अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर स्थानांतरण मांग लेना चाहिए।
हाईकोर्ट ने यह भी साफ़ किया कि राज्य की जिम्मेदारी है कि हर समुदाय को अपने निर्धारित प्रार्थना स्थल पर शांति से नमाज़ अदा करने का अधिकार मिले। अगर वह स्थान निजी संपत्ति है तो वहां पूजा के लिए राज्य की अनुमति की जरूरत नहीं होती। कोर्ट की टिप्पणी के बाद राज्य सरकार ने इस मामले में जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को फ्रेश केस के तौर पर होगी।
बता दें कि हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी याचिकाकर्ता मुनीर खान द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान की गई। याचिकाकर्ता का आरोप है कि उन्हें संभल में गाटा संख्या 291 पर स्थित एक मस्जिद में रमज़ान के दौरान नमाज़ पढ़ाने से रोका जा रहा है। याचिकाकर्ता ने नमाज अदा करने के स्थान को दर्शाने के लिए तस्वीर और राजस्व अभिलेख दाखिल करने के लिए मोहलत मांगी है।