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Yulla Kanda Krishna Temple : श्रीकृष्ण के इस अनोखे मंदिर में टोपी की अनोखी परंपरा, किस्मत जानने के लिए भक्त करते हैं ये काम

By अनूप कुमार 
Updated Date

Yulla Kanda Krishna Temple : हिमालय की गोद में बसे कृष्ण मंदिर की अनोखी परंपरा आज भी जीवित है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन इस प्राचीन मंदिर में किन्नौरी टोपी की अनोखी परंपरा का पालन किया जाता है। इसे दुनिया का सबसे ऊँचा श्रीकृष्ण मंदिर माना जाता है।

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 प्राचीन मंदिर 
युल्ला कांडा कृष्ण मंदिर हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले की रोरा घाटी में स्थित है। समुद्र तल से लगभग 12,778 फीट (3,895 मीटर) की ऊँचाई पर बना यह पवित्र मंदिर एक प्राचीन और शांत अल्पाइन (हिमयुगीन) झील के बिल्कुल बीचों-बीच स्थित है।

‘फ्लोटिंग कैप’  
स्थानीय मान्यता के अनुसार, पांडवों ने अपने वनवास के दौरान इस क्षेत्र में समय बिताया था। इस मंदिर से जुड़ी सबसे दिलचस्प परंपरा ‘फ्लोटिंग कैप’ (तैरती टोपी) की रस्म है, जो मुख्य रूप से हर साल अगस्त-सितंबर में आने वाली जन्माष्टमी के त्योहार पर आयोजित की जाती है।

स्थानीय आस्था
युल्ला कांडा को कुछ लोग स्वर्ग का द्वार भी कहते हैं। इसके अलावा, युल्ला कांडा की जन्माष्टमी का उत्सव काफी प्रसिद्ध है। स्थानीय परंपरा के अनुसार, इस दिन किन्नौरी टोपी को उल्टा करके मंदिर के पास स्थित झील में डाला जाता है। ऐसी मान्यता है कि अगर टोपी बिना डूबे झील के दूसरे छोर तक पहुंच जााए तो मनोकामना पूरी होने और आने वाला साल शुभ रहने का संकेत माना जाता है। वहीं टोपी डूबने को शुभ नहीं माना जाता है। यह स्थानीय आस्था है, जिसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

कैसे पहुंचे यहां
शुरुआती बिंदु (Base Village): इस ट्रेक का मुख्य आधार गाँव युल्ला खास है।

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सड़क मार्ग: आप शिमला से राष्ट्रीय राजमार्ग-5 (NH-5) पकड़कर रामपुर और तापरी होते हुए युल्ला खास गाँव तक गाड़ी से पहुँच सकते हैं (दूरी लगभग 230-240 किमी)।

ट्रेक की शुरुआत: युल्ला खास गाँव में गाड़ियों का रास्ता समाप्त होता है और यहीं से पैदल ट्रेक शुरू होता है।

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