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15 अगस्त सिर्फ आजादी का दिन नहीं, बल्कि इस तारीख को हुईं थी देश में ये बड़ी घटनाएं

By Harsh 
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डिजिटल डेस्क, पर्दाफाश।  15 अगस्त, एक ऐसी तारीख जिसे सुनते ही आंखों के सामने लहराता तिरंगा, लाल किले की प्राचीर और आजादी का जश्न दिखाई देने लगता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 15 अगस्त सिर्फ भारत की आजादी के लिए ही यादगार नहीं है? आजादी के बाद भी इस तारीख ने देश के इतिहास में कई बड़े और अहम पड़ाव देखे हैं। आज हम बात करेंगे कि 15 अगस्त 1947 के बाद इसी तारीख को भारत में कौन-कौन सी बड़ी घटनाएं हुईं, जिन्होंने देश के इतिहास, विज्ञान, संचार और आम लोगों की जिंदगी पर अपनी अलग छाप छोड़ी।

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सबसे पहले बात करते हैं 15 अगस्त 1950 की। आजादी के सिर्फ तीन साल बाद 15 अगस्त 1950 को भारत के इतिहास में एक बेहद विनाशकारी प्राकृतिक आपदा आई। इस दिन असम और तिब्बत के आसपास के क्षेत्र में बहुत शक्तिशाली भूकंप आया। इसकी तीव्रता करीब 8.6 से 8.7 के बीच आंकी गई। यह भूकंप इतना शक्तिशाली था कि इसके झटके भारत के कई हिस्सों में महसूस किए गए। भूकंप के कारण बड़े पैमाने पर तबाही हुई। कई इलाकों में भूस्खलन हुआ सड़कें और संपर्क मार्ग प्रभावित हुए और हजारों लोगों की जान चली गई। यह सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं थी बल्कि उस समय देश के लिए एक बड़ी चुनौती भी थी।

अब आगे बढ़ते हैं 15 अगस्त 1972 की ओर। आज जब हम किसी को चिट्ठी भेजते हैं, ऑनलाइन फॉर्म भरते हैं या किसी सरकारी दस्तावेज में अपना पता लिखते हैं, तो उसके साथ एक खास नंबर जरूर होता है- पिन कोड। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में पिन कोड व्यवस्था की शुरुआत 15 अगस्त 1972 को हुई थी? पोस्टल इंडेक्स नंबर यानि पिन कोड देश के अलग-अलग राज्यों, शहरों, कस्बों और गांवों तक डाक को सही और तेजी से पहुंचाने के लिए इस व्यवस्था को लागू किया गया। छह अंकों वाले पिन कोड ने भारत की डाक व्यवस्था को व्यवस्थित करने में बड़ी भूमिका निभाई। आज मोबाइल और इंटरनेट के दौर में भी पिन कोड की अहमियत बनी हुई है। ऑनलाइन शॉपिंग से लेकर बैंकिंग, सरकारी सेवाओं और घर तक सामान पहुंचाने में पिन कोड एक जरूरी पहचान बन चुका है। यानी 15 अगस्त 1972 को शुरू हुई यह व्यवस्था आज भी करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा है।

अब बात 15 अगस्त 1982 की। आज टीवी पर सैकड़ों चैनल हैं। मोबाइल फोन पर लाइव खबरें देखी जा सकती हैं और इंटरनेट के जरिए दुनिया के किसी भी कोने की जानकारी कुछ सेकंड में मिल जाती है। लेकिन एक समय ऐसा भी था, जब भारत में टेलीविजन की दुनिया काफी सीमित थी। 15 अगस्त 1982 को भारत में टेलीविजन के इतिहास का एक बड़ा बदलाव हुआ। इसी दिन रंगीन टेलीविजन प्रसारण और दूरदर्शन के राष्ट्रीय कार्यक्रम की शुरुआत हुई। उस दौर में रंगीन टीवी लोगों के लिए किसी नई तकनीकी दुनिया से कम नहीं था। पहले जहां लोग श्वेत-श्याम यानी ब्लैक एंड व्हाइट स्क्रीन पर कार्यक्रम देखते थे, वहीं रंगीन प्रसारण ने मनोरंजन और समाचार की दुनिया को एक नया रूप दिया। इस दिन दूरदर्शन के राष्ट्रीय प्रसारण की शुरुआत भी हुई। देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोग एक ही समय पर राष्ट्रीय कार्यक्रम और समाचार देख पाने लगे। धीरे-धीरे दूरदर्शन भारत के करोड़ों घरों का हिस्सा बन गया। समाचार, खेल, फिल्में, धारावाहिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने लोगों को एक-दूसरे से जोड़ा। इसलिए 15 अगस्त 1982 को भारतीय टेलीविजन के इतिहास में एक बड़े तकनीकी बदलाव के दिन के रूप में भी याद किया जाता है।

अब बात करते हैं 15 अगस्त 1990 की। यह दिन भारत की रक्षा और वैज्ञानिक क्षमता के लिहाज से भी खास माना जाता है। इस दिन भारत ने ‘आकाश’ मिसाइल का सफल परीक्षण किया। जोकि भारत की पहली पूरी तरह स्वदेशी, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली रक्षा प्रणाली है। इस उपलब्धि ने यह संदेश दिया कि भारत रक्षा तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बाद के वर्षों में ‘आकाश’ मिसाइल प्रणाली भारत की वायु रक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी।

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यानी 15 अगस्त सिर्फ राष्ट्रीय उत्सव का दिन नहीं रहा, बल्कि यह देश की वैज्ञानिक और रक्षा शक्ति से जुड़ी उपलब्धियों का भी गवाह बना। अगर इन घटनाओं को एक साथ देखें तो 15 अगस्त के बाद के इतिहास में हमें अलग-अलग तस्वीरें दिखाई देती हैं। एक ही तारीख, लेकिन अलग-अलग सालों में अलग-अलग घटनाएं। तो अगली बार जब 15 अगस्त आए, तो सिर्फ आजादी के जश्न को ही नहीं, बल्कि इस तारीख से जुड़ी उन ऐतिहासिक घटनाओं को भी याद कीजिए।

रिपोर्ट: कल्पना पाण्डे

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