लखनऊ। रामपुर की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपा सिंह के भ्रष्टाचार, आय से अधिक संपत्ति व संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की शिकायत लोकायुक्त से की गई है। इसकी शिकायत गौतमबुद्धनगर के सेक्टर 35 नोएडा स्थित गली नंबर-एक के मोरना गांव निवासी संजय कुमार ने लोकायुक्त से की है। इससे पहले उनकी शिकायत पर उप लोकायुक्त ने परिवाद दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सीएमओ को शिकायत पर अपना पक्ष रखने के लिए तीन अगस्त तक का समय दिया है। 25 जून को उप लोकायुक्त सचिव की ओर से जारी पत्र में काय गया है कि आपके खिलाफ दर्ज परिवाद में पहले 13 जून को जबाव देने के लिए कहा गया था, लेकिन आपके के तरफ से तीन सप्ताह का समय दिए जाने का अनुरोध किया गया।
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आपके अनुरोध पर उप लोकायुक्त ने तीन अगस्त तक का समय दिया है। कहा है कि आय से अधिक संपत्ति अर्जित किए जाने के आरोप के खंडन में अपनी सुस्पष्ट आख्या मय साक्ष्य तथा आय से अधिक संपत्ति अर्जित किए जाने के संबंध में संबंधित संलग्न प्रारूप पर सुस्पष्ट आय-व्यय का समुचित गणना चार्ट के साथ परिवार के सभी सदस्यों के पिछले पांच वर्ष की आइटीआर की प्रति शपथ पत्र के माध्यम से नियत तिथि से पूर्व उपलब्ध कराएं। डा. दीपा सिंह यहां पिछले वर्ष ही रामपुर सीएमओ के रूप में कार्यरत हुई हैं।
बता दें कि इससे पहले वह बागपत में एससीएमओ थीं। वहां एसीएमओ रहते हुए उन पर अल्ट्रासाउंड सेंटरों में अनियमितता कराकर लिंग परीक्षण को बढ़ावा देने समेत अन्य कई आरोप लगे थे। बागपत के जिलाधिकारी ने उनके निलंबन व उच्च स्तरीय जांच के लिए छह सितंबर 2025 को प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को पत्र लिखा था। हालांकि दो दिन बाद ही शासन ने उन्हें सीएमओ बनाकर रामपुर जिले में तैनात कर दिया था। अब उन पर आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप लगा है।
लोकायुक्त अधिनियम के अंतर्गत शिकायत प्रस्तुत
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लोकायुक्त से 28 अप्रैल 2026 को को भेजे पत्र में शिकायतकर्ता ने संजय कुमार ने जनहित में प्रस्तुत की जा रही है। आरोपी मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जनपद रामपुर डॉ. दीपा सिंह के विरुद्ध भ्रष्टाचार, आय से अधिक संपत्ति अर्जन व संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के संबंध में निम्न तथ्य प्रथम दृष्टया संज्ञान में आए हैं। आरोपी अधिकारी ने एक अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2026 के दौरान कुल लगभग 57,39,000 रुपये की वेतन आय प्राप्त हुई है। तथापि उक्त वेतन का समुचित उपयोग न करते हुए, विभिन्न खातों एवं निवेशों में धन का स्थानांतरण किया गया है। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, आरोपी द्वारा लगभग 12,20,000 रुपये की राशि Yes Bank में स्थानांतरित की गई है तथा लगभग 26,00,000 रुपये की राशि क्षितिजा (Kshitija) के खाते में स्थानांतरित की गई है। इसके अतिरिक्त लगभग 2,50,000 रुपये की राशि SBI Life Insurance में निवेश की गई है तथा लगभग 7,60,000 रुपये की राशि मार्च माह में किसी अन्य खाते/व्यक्ति को स्थानांतरित की गई है।
इस प्रकार कुल लगभग 28,00,000 रुपये की राशि विभिन्न माध्यमों से स्थानांतरित/निवेशित की गई है, जबकि वर्तमान में भी आरोपी के खाते में लगभग 25,00,000 रुपये की राशि शेष पाई जाती है। इस प्रकार कुल उपलब्ध धनराशि (225,00,000/-+28,00,000/-) लगभग 53,00,000 रुपये होती है, जबकि आरोपी को उपरोक्त अवधि में कुल वेतन आय 57,39,000 रुपये प्राप्त हुई है। उल्लेखनीय है कि उपरोक्त गणना के अनुसार लगभग 3,00,000 रुपये से अधिक राशि व्यक्तिगत घरेलू व्यय में खर्च की गई प्रतीत होती है, तवापि यह स्पष्ट नहीं है कि दो वर्षों की समस्त जीवन-यापन व्यय (रहना, भोजन, परिवहन आदि) उक्त सीमित राशि में कैसे संभव हुआ। अतः उपरोक्त तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि आरोपी द्वारा वेतन आय के अतिरिक्त अन्य स्रोतों से पन का उपयोग किया गया है, जिसका कोई स्पष्ट व वैध स्रोत परिलक्षित नहीं होता, जो प्रथम दृष्टया संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों व आय से अधिक सपति अर्जन की ओर संकेत करता है।
पंजाब नेशनल बैंक खाते में एक अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2026 के मध्य लगभग 21,72,000 रुपये की महत्वपूर्ण नकद जमा पाई गई है, जिसके संबंध में अब तक कोई स्पष्ट एवं प्रमाणित वैध स्रोत उपलब्ध नहीं है। आरोप है कि उक्त अधिकारी ने पद पर रहते हुए पिछले पांच वर्षों में गाजियाबाद में एक दुकान (कीमत लगभग 01 करोड़ रूपये) व एक फ्लैट (कीमत लगभग 01 करोड़ 20 लाख रुपये) व देहरादून में एक निजी मकान जिसकी कीमत लगभग 85 लाख रूपये है तथा मेरठ के पल्लवपुरम में एक कोठी (कीमत लगभग 04 करोड़ रूपये) की अकूत सम्पत्ति इकट्ठा की है एवं इनके परिवार के पास 03 लक्जरी गाड़ियां भी हैं। 4 उक्त धनराशि का उपयोग गाजियाबाद स्थित वेव एलिगो परियोजना खाता UCHDPL में लगभग 78,00,000 रुपये के फ्लैट में निवेश हेतु किया गया है, जिसकी वैधता व स्रोत की पुष्टि आवश्यक है।
बता दें कि कानपुर नगर, प्रयागराज के समेत अन्य सीएमओ पर भ्रष्टाचार,आय से अधिक संपत्ति के आरोप लग चुके हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इन पर किसकी कृपा है? जो लगातार शिकायतों के बाद भी शासन शिकंजा कसने की परहेज कर रहा है।