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वित्त मंत्रालय के आंकड़ों पर अखिलेश का पलटवार : बैंकों के निजीकरण, खाते से पैसे कटने और ऑनलाइन फ्रॉड समेत 12 मुद्दों पर दागे सवाल

By Abhimanyu 
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Akhilesh Yadav vs. Ministry of Finance : वित्त मंत्रालय ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के आरोपों पर पलटवार करते हुए शुक्रवार को कहा कि सरकार के लगातार हस्तक्षेप और बैंकिंग सुधारों के चलते सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक का सर्वाधिक 1.98 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया। इस पर यूपी के पूर्व सीएम ने पलटवार करते हुए मंत्रालय पर 12 स्वाल दाग दिये हैं। इनमें बैंकों के निजीकरण, खाते से पैसे कटने और ऑनलाइन फ्रॉड समेत कई मुद्दे शामिल हैं।

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सपा सांसद अखिलेश यादव ने कहा, “बारह साल, बारह सवाल… 1. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर बेचे क्यों जा रहे हैं? 2. बैंक मजबूत हुए हैं तो ग़रीब जनता के खाते से पैसे क्यों काटे जा रहे हैं? 3. बैंक मजबूत हुए हैं तो बार-बार केवाईसी के नाम पर जनता के पैसे देने से इंकार क्यों किया जा रहा है? 4. बैंक मजबूत हुए हैं तो उन लोगों को पकड़कर देश में लाकर सज़ा क्यों नहीं दी जा रही है, जो बैंको से खरबों का लोन लेकर भाग गये हैं? 5. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर ग्रामीण इलाकों में ब्रांच और ATM बंद करके जनता को कैश के लिए क्यों भटकाया जा रहा है?”

सपा प्रमुख ने आगे लिखा, “6. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर किसानों, छात्रों और छोटे दुकानदारों को बिना बिचौलिये और बिना गारंटर के लोन क्यों नहीं मिल रहा है? 7. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर साइबर ठगी का शिकार हुए गरीब आदमी का पैसा तुरंत वापस क्यों नहीं होता, उसे थाने और बैंक के चक्कर क्यों कटवाए जाते हैं? 8. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर होम लोन और शिक्षा लोन पर ब्याज इतना ज़्यादा क्यों है कि आम आदमी की कमर टूट रही है? 9. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर डिजिटल ट्रांजेक्शन फेल होने पर जनता का पैसा कई-कई दिन तक होल्ड पर क्यों रखा जा रहा है?”

वित्त मंत्रालय के पोस्ट पलटवार करते हुए अखिलेश ने कहा, “10. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर CIBIL स्कोर में छोटी सी चूक पर नौजवानों को डिफॉल्टर बताकर उनका भविष्य क्यों खराब किया जा रहा है? 11. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर बुजुर्गों और अनपढ़ लोगों को UPI और ऑनलाइन फ्रॉड से बचाने के लिए हर ब्रांच में सहायता काउंटर क्यों नहीं है? 12. बैंक मजबूत हुए हैं तो बैंक कर्मियों की जायज़ माँगे क्यों नहीं मानी जा रही हैं और बैंकों में नई भर्ती क्यों नहीं हो रही और मौजूदा कर्मचारियों पर इतना दबाव क्यों है कि ग्राहक सेवा ही चौपट हो रही है?”

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