Pakistan Viral Video: सोशल मीडिया पर आये दिन कुछ न कुछ वायरल होता रहता है। ऐसे ही इन दिनों पाकिस्तान से एक मजेदार वीडियो सामने आया है, जो सोशल मीडिया यूजर्स को हंसने पर मजबूर कर दे रहा है। पड़ोसी देश पाकिस्तान के सिंध प्रांत के एक माननीय विधायक साहब मोहम्मद अली, जिन्ना साहब को श्रद्धांजलि देने के लिए खड़े होते हैं। हाथ में पकड़े होते हैं एक सरकारी प्रस्ताव जो अंग्रेजी में होता है,वह बोलना शुरु करते हैं लेकिन जुबान ने साथ ही नहीं दिया और हर दूसरे शब्द पर अटका दिया। अब इस वीडियो के सामने आते ही मीम्स की बाढ़ आ गई है।
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पाकिस्तानी विधायक ने किया अंगेजी का कत्ल
दरअसल, कराची के केमारी से ताल्लुक रखने वाले MPA यानि मेंबर ऑफ प्रोविंशियल असेंबली मेंबर मोहम्मद शब्बीर कुरैशी को विधानसभा सत्र के दौरान जिन्ना की शान में कसीदे पढ़ने थे। फिर क्या इंग्लिश में, लिखा वह कसीदा जब उन्होंने पढ़ना शुरू किया, तो उनकी अंग्रेजी सुनकर सदन में मौजूद अन्य नेता, जिनमें सिंध के वरिष्ठ मंत्री शरजील मेमन और गृह मंत्री भी शामिल थे, अपनी हंसी नहीं रोक पाए।
A video of Sindh Assembly MPA Muhammad Shabbir Qureshi struggling to pronounce English words while reading a resolution has gone viral on social media.#SindhGovt pic.twitter.com/zQPwipgqeB
— Abdul Aziz Khan (@AbdulAzizANP) September 13, 2026
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वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि शब्दों को सही से बोलने के लिए कुरैशी को अपने पास बैठे साथी विधायकों की मदद भी लेनी पड़ी। शब्बीर कुरैशी की अंग्रेजी पढ़ने के संघर्ष को देखकर ऐसा लग रहा है, मानो रूसी भाषा का कोई कठिन कोड डिकोड कर रहे हैं।
ऐसा कसीदा पढ़ा कि आ गई मीम्स की बाढ़
प्रस्ताव अंग्रेजी में ड्राफ्ट होने के कारण कुरैशी पढ़ते समय बार-बार रुके और उन्होंने कई शब्दों का गलत उच्चारण किया जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो पर मानो मीम्स की बाढ़ सी आ गई। यूजर्स ने इसपर तरह-तरह से कमेंट किया है। किसी ने कहा कि जिन्ना खुद लंदन के लिंकन इन से पढ़े हुए बड़े बैरिस्टर थे और उनकी अंग्रेजी बहुत शानदार थी। ऊपर से ये सब देखकर जिन्ना भी सोच रहे होंगे कि उर्दू में ही बोल लेता भाई। वहीं कुछ ने तो एक सुर में कहा, भाई साहब इंग्लिश का ऐसा कत्ल तो शायद ही कभी देखा हो।
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक नई बहस शुरू हो गई है। कई लोगों ने यह सवाल उठाया कि जब पाकिस्तान के संस्थापक को श्रद्धांजलि देनी थी, तो प्रस्ताव अंग्रेजी में क्यों पढ़ा गया? इसे देश की राष्ट्रीय या क्षेत्रीय भाषाओं- उर्दू या सिंधी में भी पढ़ा जा सकता था। वहीं, कुछ लोगों ने नेताओं की तैयारी और शैक्षणिक योग्यता पर भी चुटकी ली है।
हालांकि, इस असहज स्थिति और टोका-टोकी के बावजूद उन्होंने किसी तरह अपना भाषण पूरा किया और बाद में सदन द्वारा इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। और कुरैशी साहब की ओर से इस पर कोई सफाई नहीं आई है, लेकिन उनका यह अंदाज देखकर इंटरनेट की जनता लोटपोट हो रही है।