Badrinath Dham 2026 :हिमालय की गोद में बसे बद्रीनाथ धाम के कपाट आज 23 अप्रैल 2026 को सुबह 6:15 बजे ब्रह्म मुहूर्त में भक्तों के लिए खोल दिए गए हैं। वैदिक मंत्रोच्चार और सेना के बैंड की मधुर धुनों के बीच भगवान ‘बदरी विशाल’ के जयकारों से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा। क्या आप जानते हैं कि बद्रीनाथ में शंख बजाना क्यों वर्जित है?
ज्ञान और मोक्ष का द्वार
बद्रिकाश्रम (बद्रीनाथ) हिमालय में स्थित एक अत्यंत पवित्र तपस्थली है। यह स्थान भगवान विष्णु का प्रमुख धाम माना जाता है (चार धाम में से एक)। पौराणिक मान्यता के अनुसार यहाँ ऋषि-मुनि तपस्या करते थे, और यही स्थान ज्ञान और मोक्ष का द्वार माना गया है। स्कंद पुराण के केदारखंड में इसका विशेष महत्व बताया गया है।
पढ़ें :- Amarnath Yatra Update : उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, बोले- इस बार 57 दिन चलेगी अमरनाथ यात्रा, 29 जून को होगी पहली पूजा
सरस्वती नदी ज्ञान और चेतना का प्रतीक
सरस्वती नदी को “गुप्त (अदृश्य) नदी” कहा जाता है। मान्यता है कि यह नदी बद्रिकाश्रम के पास प्रकट होती है और आगे जाकर लुप्त हो जाती है। यह नदी केवल भौतिक नहीं, बल्कि ज्ञान और चेतना का प्रतीक है। ऋग्वेद में इसे “नदियों की माता” कहा गया है। बद्रीनाथ के पास “भीम पुल” के पास आज भी सरस्वती का तेज प्रवाह देखा जाता है।
वाग्देवी (माँ सरस्वती)
वागदेवी का अर्थ है “वाणी की देवी”, यानी ज्ञान, बुद्धि और कला की देवी।
इन्हें ही सरस्वती देवी कहा जाता है।
यह संगीत, शिक्षा और विद्या की अधिष्ठात्री हैं।
इन्हें वीणा, पुस्तक और हंस के साथ दर्शाया जाता है।