Bhadrapada Purnima 2026 Date : भाद्रपद पूर्णिमा हिंदू धर्म में एक अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण तिथि है।
पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व मन, चेतना और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के पूर्णता से जुड़ा है। इस दिन चंद्रमा अपनी संपूर्ण कलाओं और तेज के साथ होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन धरा (पृथ्वी) और परमधाम के बीच की दूरी न्यूनतम हो जाती है, जिससे इस दिन किया गया जप, तप और दान सीधे ईश्वर तक पहुँचता है। यह तिथि अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक। गौतम बुद्ध को पूर्णिमा पर ही ज्ञान (बोध) प्राप्त हुआ
पढ़ें :- Mangal Gochar 2026 : ग्रहों के सेनापति मंगल का नीच राशि में गोचर! 18 सितंबर से इन राशियों को मिलेगी चुनौती
भाद्रपद पूर्णिमा का पौराणिक महत्व
भाद्रपद पूर्णिमा के दिन उन पूर्वजों का श्राद्ध या तर्पण किया जाता है जिनका निधन किसी भी महीने की पूर्णिमा तिथि को हुआ हो। इसके अगले दिन (27 सितंबर) से आश्विन प्रतिपदा तिथि के साथ नियमित Pitru Paksha Shradh शुरू हो जाता है
मन और चेतना का प्रभाव
चंद्रमा मन का कारक है। पूर्णिमा पर ज्वार-भाटे की तरह मानव शरीर (जिसमें जल तत्व प्रमुख है) और मानसिक तरंगों पर गहरा असर होता है। सही साधना से ऊर्जा ऊर्ध्वगामी (ऊपर की ओर) होती है।
इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने के बाद भूखे या जरूरतमंद लोगों को भोजन, अनाज और वस्त्रदान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।