Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. जीवन मंत्रा
  3. Bhopal AIIMS Study : भरपूर नींद है इम्यूनिटी बूस्टर, बल्कि कैंसर के खतरे को भी करती है कम

Bhopal AIIMS Study : भरपूर नींद है इम्यूनिटी बूस्टर, बल्कि कैंसर के खतरे को भी करती है कम

By santosh singh 
Updated Date

भोपाल: एम्स भोपाल (AIIMS Bhopal) के वैज्ञानिकों (Scientists) ने स्वास्थ्य और जीवनशैली को लेकर हुए एक महत्वपूर्ण शोध में चौंकाने वाला खुलासा किया है। अध्ययन (Study) के अनुसार, नियमित और पर्याप्त नींद (Regular And Sufficient Sleep) न केवल शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को मजबूत करती है, बल्कि यह कैंसर (Cancer) के जोखिम को कम करने में भी निर्णायक भूमिका निभाती है। अंतरराष्ट्रीय जर्नल (International Journal) में प्रकाशित यह शोध बताता है कि नींद की कमी और कैंसर के बीच सीधा संबंध है।

पढ़ें :- Organ Transplant Science : इंसान के शरीर में पहली बार ट्रांसप्लांट हुआ सुअर का लिवर-किडनी, जानें पूरा मामला

बायोलॉजिकल क्लॉक और कैंसर का कनेक्शन

एम्स भोपाल के बायोकेमिस्ट्री विभाग के प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में कहा गया है कि मानव शरीर एक प्राकृतिक चक्र पर चलता है, जिसे ‘सर्केडियन रिदम’ (Circadian Rhythm) कहा जाता है।

अध्ययन के अनुसार, ‘देर रात तक जागना, नाइट शिफ्ट में काम करना, मोबाइल स्क्रॉलिंग और खान-पान का अनियमित समय शरीर की इस जैविक घड़ी (बायोलॉजिकल क्लॉक) को बिगाड़ देता है। इससे हार्मोनल असंतुलन पैदा होता है, जिससे शरीर में कैंसर कोशिकाओं को पनपने और फैलने का अवसर मिल जाता है।

नींद की कमी से कमजोर होती है इम्यूनिटी

पढ़ें :- 'हृदय रोग और कैंसर गंभीर स्वास्थ्य चुनौती, समय पर जांच और आधुनिक इलाज से संभव है बेहतर जीवन'

रिसर्च स्पष्ट करता है कि जब हमारी नींद का चक्र बाधित होता है, तो बीमारियों से लड़ने की शरीर की क्षमता कम हो जाती है। बाधित बायोलॉजिकल क्लॉक के कारण:

पाचन प्रक्रिया और मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है।

संक्रमण (Infections) का खतरा बढ़ जाता है।

शरीर की प्राकृतिक कोशिका मरम्मत (Cell Repair) प्रक्रिया धीमी हो जाती है।

भविष्य का इलाज: पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट

पढ़ें :- Breast Milk : मां के दूध में निकला कैंसर वाला जहर, बिहार के इन 6 जिलों के नौनिहालों की जान पर आफत

शोधकर्ताओं का मानना है कि भविष्य में कैंसर का उपचार अधिक ‘पर्सनलाइज्ड’ होगा. इसमें केवल दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय मरीज की नींद के पैटर्न और उसकी जैविक घड़ी को भी उपचार का हिस्सा बनाया जाएगा. विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर भोजन और संतुलित जीवनशैली अपनाकर कैंसर के खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है।

विशेषज्ञों की सलाह: मोबाइल से बनाएं दूरी

एम्स भोपाल के निदेशक डॉ. माधवानंद ने इस शोध को आम जनता के लिए एक चेतावनी और मार्गदर्शन बताया है। उन्होंने सलाह दी है कि सोने और जागने का एक निश्चित समय तय करें। देर रात तक मोबाइल और अन्य स्क्रीन के इस्तेमाल से बचें। स्वस्थ दिनचर्या को सुरक्षा कवच के रूप में अपनाएं। यह शोध स्पष्ट करता है कि पर्याप्त नींद लेना विलासिता नहीं, बल्कि गंभीर बीमारियों से बचने के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता है।

Advertisement