Deepotsav : वैदिक पंचांग के अनुसार पांच दिवसीय दीपोत्सव का दिवाली त्यौहार कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। यह पर्व ज्ञान (प्रकाश) का अज्ञानता (अंधेरे) पर विजयी होने का प्रतीक है। दीवाली पाँच दिनों तक मनाई जाती है: धनतेरस, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा और भाई दूज।
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दीपोत्सव की शुरुआत कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी से होती है, जिसे हम धनतेरस कहते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इस दिन आरोग्य और समृद्धि के लिए दीप जलाया जाता है और यमराज के लिए ‘यम दीपदान’ किया जाता है।
दूसरा दिन रूप चौदस या नरक चतुर्दशी कहलाता है। इसी दिन भगवान कृष्ण ने अत्याचारी असुर नरकासुर का वध करके उसकी कैद से 16,100 कन्याओं को मुक्त कराया था। इस दिन सुबह जल्दी स्नान कर बुराई के अंत और सौंदर्य-स्वच्छता के प्रतीक के रूप में दीए जलाए जाते हैं।
तीसरे दिन आता है महापर्व का मुख्य दिन—दिवाली। इसकी दो प्रमुख पौराणिक कथाएं हैं। पहली—इसी अमावस्या को माता लक्ष्मी क्षीरसागर से प्रकट हुई थीं। दूसरी—14 वर्ष का वनवास और लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में पूरी अयोध्या को घी के दीयों से रोशन किया गया था, जो अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है।
चौथा दिन प्रकृति की पूजा का है। पौराणिक कथा के अनुसार, इंद्र देव के अहंकार को तोड़ने और ब्रजवासियों की रक्षा के लिए भगवान कृष्ण ने अपनी कनिष्ठिका उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया था। यह दिन हमें प्रकृति, पर्यावरण और पशुधन के प्रति आभार व्यक्त करना सिखाता है।
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महापर्व का समापन भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक भाई दूज से होता है। इसे यम द्वितीया भी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन मृत्यु के देवता यमराज अपनी बहन यमुना के घर आए थे। यमुना ने प्रेम से उन्हें तिलक लगाया और भोजन कराया। यमराज ने वरदान दिया कि जो भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा।
यह पांच दिवसीय दीपोत्सव सिर्फ दीयों का त्योहार नहीं, बल्कि आरोग्य, धर्म, प्रकाश, प्रकृति और रिश्तों के सम्मान का महापर्व है। आप सभी को दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं! वीडियो को लाइक और चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें।