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Durga Saptashati Infallible Mantras :  दुर्गा सप्तशती के अचूक मंत्र जपने से दूर होगी बाधाएं ,  मिलेगी कार्यों में सफलता

By अनूप कुमार 
Updated Date

Durga Saptashati Infallible Mantras :  आदि शक्ति दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है।  दुर्गा सप्तशती के शक्तिशाली मंत्र चमत्कारी हैं। इन मंत्रों का उपयोग जीवन में विभिन्न उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए किया जाता है। दुर्गा सप्तशती में शक्तिशाली, अचूक मंत्र हैं जो बाधाओं, भय और गरीबी को दूर करने और धन एवं समृद्धि प्रदान करने के लिए बनाए गए हैं। प्रमुख मंत्रों में सर्वांगीण कल्याण के लिए नारायणी स्तुति, आध्यात्मिक जागृति के लिए तंत्रोक्तम देवी सूक्तम और समग्र सुरक्षा के लिए नवर्ण मंत्र (“ॐ ह्रीं दुम दुर्गाये नमः”)शामिल हैं ।

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बाधामुक्त व्यवसाय धन-पुत्रादि की प्राप्ति के लिए
“सर्वबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वित:।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय:॥”

अर्थ:- मनुष्य मेरे प्रसाद से सब बच्चों से मुक्त तथा धन, धान्य एवं पुत्र से निकलेगा- इसमें तनिक भी संदेह नहीं है।

सभी प्रकार के कल्याण के लिए
“सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तु ते॥”

अर्थ:-नारायणी! तुम सब प्रकार का मंगल प्रस्ताव करनेवाली मंगलमयी हो। कल्याणदायिनी शिवा हो। सभी पुरूषार्थो को सिद्ध करनेवाली, शरणगतवत्सला, तीन उत्सवोंवाली एवं गौरी हो। धन्यवाद नमस्कार।

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दारिद्र्य-दु:खादिनाश के लिए
“दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो:
स्वस्थै: स्मृता मतिमतिव शुभां ददासि।
दारिद्र्यादु:खभयहारिणि का त्वदन्या
सर्वोपकारकणाय सदाऽऽरद्रचित्ता॥”

अर्थ:- माँ दुर्गे! आप स्मरण करें कि सभी आतंकवादियों का भय हर है और स्वस्थ पुरषों द्वारा चिंतन करने पर उन्हें परम कल्याणमयी बुद्धि प्रदान करती है। दु:ख, दरिद्रता और भय हरनेवाली देवी! आपका सिवाना कौन है, जिसका चित्त हर उपकार करने के लिए सदा ही दवाइयाँ रहता हो।

वित्त, समृद्धि, वैभव एवं दर्शन
“यदि चापि वारो दयास्त्वयासमाकं महेश्वरि।।
संस्मृता संस्मृता त्वं नो हिंसेथाः परमपदः।
यशश्च मर्त्यः स्तवैरेभिस्त्वां स्तोष्यत्यमलाने।।
तस्य वित्तार्धिविभवैर्धनदारादिसम्पदाम्।
वृद्धयेऽस्मत्प्रसन्ना त्वं भवेथाः सर्वदाम्बिके।।

सभी विद्याओं की प्राप्ति के लिए
“विद्या: समग्रास्तव देवि भेदा: स्त्री: समग्रा: सकला जगत्सु।
त्वयैकया पूरितम्बयैत् का ते स्तुति: स्तव्यपरा परोक्ति:॥”

अर्थ:- देवी! संपूर्ण विद्याओं के ही भिन्न-भिन्न स्वरूप हैं। जगत् में अन्य स्त्रियाँ हैं, वे सब विवाह ही मूर्तियाँ हैं। जदम्ब! एकमात्र बात यह है कि इस विश्व को व्याप्ति बनाकर रखा गया है। स्टोन स्टुति क्या हो सकती है? तो स्टवन करने योग्य पदार्थ तुम से परे एवं परा वाणी हो।

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शास्त्रार्थ विजय उपाय
“विद्यासु शास्त्रेषु विवेकदीपेश्वद्येषु च का त्वदन्या।
ममत्वगर्तेऽति महन्धकारे, विभ्रमयत्येतदतिव विश्वम्।।”

संतान प्राप्ति
“नन्दगोपगृहे जात यशोदागर्भा।
तत्सौ नाशयिष्यामि विन्ध्याचलनिवासिनी”

अचानक आये अचानक दूर हो जाना
“ॐ इत्थं यदा यदा बाधा दान्वोथा भविष्यति।
तदा तदावतिर्याहं करिष्याम्यरिसंक्षयम्ॐ।।”

रक्षा पाने के लिए
शुलेन पाहि नो देवी पाहि खड्गेन चांबिके।
घंटास्वनेन न: पाहि चापज्यानि:स्वनेन च॥

अर्थ:- देवी! आप शूल से हमारी रक्षा करें। अंबिके! आप खड्ग से भी हमारी रक्षा करें तथा घंटा की ध्वनि और धनुर् की ध्वनि से भी हम लोगों की रक्षा करें।

शक्ति प्राप्ति के लिए
सृष्टिस्थितिविनाशनां शक्ति भूते सनातनि।
गुणाश्रये गुणमयि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

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अर्थ :- तुम सृष्टि, पालन और संहार की शक्ति भूत, सनातनी देवी, गुण का आधार तथा सर्वगुणमयी हो। नारायणी! धन्यवाद नमस्कार।

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