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राबड़ी सरकार में सबसे युवा मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री बनने तक, जानें- सम्राट चौधरी के बिहार में पहले भाजपाई CM बनने का सफर

By Abhimanyu 
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Samrat Choudhary takes oath as Chief Minister : भाजपा नेता सम्राट चौधरी बुधवार को बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले ली है। यह पहली बार होगा जब भाजपा राज्य में सरकार का नेतृत्व करेगी। सम्राट चौधरी राज्य के 24वें मुख्यमंत्री बनें हैं। उन्हें राज्यपाल सैय्यद अता हसनैन मुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई है।

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सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन समेत एनडीए के शीर्ष नेता मौजूद रहे। एनडीए में भाजपा, नीतीश कुमार की जेडीयू और तीन अन्य पार्टियां शामिल हैं। इसके अलावा, कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी इस शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए।

कौन हैं सम्राट चौधरी? 

सम्राट चौधरी (राकेश कुमार) के पिता शकुनी चौधरी बिहार की राजनीति के दिग्गज नेता रहे हैं, जो कांग्रेस से लेकर समता पार्टी और आरजेडी का हिस्सा रहे हैं। वह बिहार की सियासत में ओबीसी चेहरा माने जाते थे। शकुनी चौधरी ने विधायक से लेकर सांसद तक का सफर तय किया और उनकी सियासत सम्राट चौधरी को विरासत में मिली है।

सम्राट ने बिहार में 1990 के दशक में आरजेडी से अपने सियासी सफर की शुरुआत की थी और 1999 में राबड़ी देवी की सरकार में वह 19 साल की उम्र में मंत्री बने थे। लालू ने सम्राट चौधरी को एमएलसी बनाकर मंत्री बनाया था, लेकिन उम्र को लेकर विवाद के बाद सम्राट ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

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फिर सम्राट ने आरजेडी छोड़कर जेडीयू का दामन थाम लिया। साल 2014 में नीतीश कुमार ने सीएम पद छोड़ा तो जीतनराम मांझी को मुख्यमंत्री बनें। तब सम्राट को बिहार में मांझी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया। लेकिन, मांझी के बाद नीतीश सरकार में उन्हें कैबिनेट में जगह नहीं मिल सकी।

जेडीयू में मोहभंग होने के बाद सम्राट ने जेडीयू को अलविदा कह दिया। उन्होंने साल 2018 में भाजपा का दामन थाम लिया। जहां वह भाजपा का चेहरा बनकर उभरे। साल 2019 में नित्यानंद राय जब प्रदेश अध्यक्ष थे तो सम्राट चौधरी को उपाध्यक्ष बनाया गया। फिर वह बिहार में दो बार डिप्टी सीएम बनें और अब उन्होंने पहले भाजपाई सीएम के रूप में शपथ ली है।

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