उत्तर प्रदेश के नेताओं के बीच एक शब्द चल पड़ा है 'विकास पुरुष'। जो भी मुख्यमंत्री बनता है, उसके समर्थक उसे विकास पुरुष कहते नहीं अघाते लेकिन सही मायने में नारायण दत्त तिवारी ही उत्तर प्रदेश के पहले 'विकास पुरुष' माने जाते हैं। तिवारी जी को लेकर मेरे अनेक संस्मरण हैं लेकिन तीस साल पहले का एक वाकया याद आता है, जब उनकी मेरी पहली व्यक्तिगत मुलाकात हुई थी और मैंने उनका इंटरव्यू किया था।
Narayan Datt Tiwari Story : राजनीति अपने साथ भूत, वर्तमान, भविष्य को समेटे आगे बढ़ती रहती है। राजनीति के किस्से नई पीढ़ी के लिए नजीर बन जाते है। राजनीति की ‘यादों के झरोखे’ में पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी का नाम आदर के साथ लिया जाता है। संगम नगरी प्रयागराज जो पहले इलाहाबाद के नाम से विख्यात रही, अपनी प्रतिभाओं की यादों को संजोने में आज भी तत्तपर रहती है। वरिष्ठ पत्रकार रतीभान त्रिपाठी का भी इस शहर से गहरा नाता है। वो जब अपनी पत्रकारिता के संस्मरणों को पलटते हैं तो एक प्रमुख नाम पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी का आता है। तीस साल पहले की एक स्मृति में साझा करते हुए वरिष्ठ पत्रकार रतीभान त्रिपाठी उत्साह से भर जाते हैं।
आज 18 अक्टूबर है। आज नारायण दत्त तिवारी का जन्मदिन है। उत्तर प्रदेश के नेताओं के बीच एक शब्द चल पड़ा है ‘विकास पुरुष’। जो भी मुख्यमंत्री बनता है, उसके समर्थक उसे विकास पुरुष कहते नहीं अघाते लेकिन सही मायने में नारायण दत्त तिवारी ही उत्तर प्रदेश के पहले ‘विकास पुरुष’ माने जाते हैं। तिवारी जी को लेकर मेरे अनेक संस्मरण हैं लेकिन तीस साल पहले का एक वाकया याद आता है, जब उनकी मेरी पहली व्यक्तिगत मुलाकात हुई थी और मैंने उनका इंटरव्यू किया था।
बात 1995 की है। कांग्रेस में उठा-पटक चल रही थी। उठा-पटक से तिवारी जी नाराज थे। उन्होंने अलग होकर अर्जुन सिंह समेत अनेक नेताओं को साथ लिया और अपनी अलग कांग्रेस पार्टी बना ली। तमाम पुराने कांग्रेसी उनके साथ जुड़ गए थे। उन्होंने अपनी पार्टी मजबूत करने के लिए यात्रा शुरू कर दी। फिर इलाहाबाद तो कांग्रेसियों का तीर्थस्थल ही था। तिवारी जी अपनी यात्रा लेकर इलाहाबाद आए थे।
तिवारी जी के बहुत करीबी और शुभचिंतक रहे स्वतंत्रता सेनानी, पूर्व मंत्री और वरिष्ठ पत्रकार पीडी टंडन जी का मेरे पास फोन आया। मैं उन दिनों दैनिक जागरण में रिपोर्टर था। टंडन जी बोले, एनडी मेरे घर आ रहे हैं। तुम चाहो तो उनका इंटरव्यू कर सकते हो लेकिन अकेले ही आना। मैंने कहा कि सर, फोटोग्राफर तो लाऊंगा ही, कि वो भी नहीं। बोले- फोटोग्राफर लेते आना।
टंडन जी समय के बहुत पाबंद व्यक्ति थे। उन्होंने जो समय दिया, अगर आप जरा भी लेट हुए तो मानकर चलिए, वापस लौटना पड़ेगा। मैंने मार्क टुली से किस्सा सुन चुका था, सो एकदम राइट टाइम था। मेरे साथ फोटोग्राफर शरद मालवीय थे।
पीडी टंडन जी ने जो समय बताया था, ठीक उसी समय एनडी तिवारी उनके यहां पहुंचे। उनका काफिला और ताम-झाम सब बाहर। सारे नेता कार्यकर्ता टंडन जी के दरवाजे के बाहर ही रोक दिए गए थे। यह एनडी तिवारी की पीडी टंडन से व्यक्तिगत मुलाकात थी।
टंडन जी के परिवार के अलावा अगर कोई तीसरा व्यक्ति वहां था तो सिर्फ मैं। शरद को सिर्फ फोटो अपार्चुनिटी दी गई थी। टंडन जी ने तिवारी जी से मेरा परिचय कराया। मैं युवा था। अपनी शब्दावली में उनसे मेरी जो भी तारीफ की, उससे तिवारी जी बहुत प्रसन्न दिखे।
तिवारी जी से मैंने उस समय के राजनीतिक हालात पर सवाल किए। उनके पार्टी गठन से लेकर यात्रा तक के सवाल अपने बुद्धिकौशल के हिसाब से पूछे। तिवारी जी तो मंजे हुए और हाज़िर जवाब नेता। बेजोड़ शख्सियत के धनी। उनके जवाब ऐसे कि उनसे ही सवाल निकलते गए। खैर, टंडन जी संबंधों को लेकर पूछा तिवारी जी की यादों की बरात निकल पड़ी।
एनडी तिवारी बहुत भावुक हो गए। पीडी टंडन की ओर मुखातिब तिवारी जी की शब्दगंगा लहर-लहर बहने लगी। बोले- ये मेरा मंदिर है, ये मेरे देवता हैं। मैं तो पहाड़ से आया था । झोले में एक लुटिया लेकर। इन्होंने ही मुझे आनंद भवन में एक कोठरी दिलवाई। इन्होंने मेरी इतनी मदद की, जिसके लिए मेरे पास शब्द नहीं। मैं आज जो कुछ हूं, जहां पर हूं, इनकी मदद के बिना भला यह कहां संभव हो पाता…।
तिवारी जी की यादों का काफिला शायद नहीं रुकता, अगर टंडन जी उन्हें यह कहते हुए न रोकते कि बस बहुत तारीफ कर दी आपने मेरी, अब चाय पीजिए। और इन्हें जाने दीजिए क्योंकि शाम का वक्त है। इन्हें खबरें लिखनी हैं। और आपका इंटरव्यू भी तो लिखना होगा इनको।
तिवारी जी उसके बाद बहुत बार इलाहाबाद आए। वह यहां आने पर वरिष्ठ नेता सुनीत व्यास के घर भी जाया करते थे। एनडी तिवारी से मुलाकात हरिद्वार और लखनऊ में भी हुई। मैं जब जब उनसे मिला, वह पीडी टंडन के बारे में जरूर पूछते थे।
(वरिष्ठ पत्रकार रतीभान त्रिपाठी)
( लेखक वरिष्ठ पत्रकार,स्तम्भकार हैं)
(फोटो में बाएं वरिष्ठ पत्रकार रतीभान त्रिपाठी, बीच में एनडी तिवारी और दाएं पीडी टंडन)
फोटो क्रेडिट : शरद मालवीय, वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट।