नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक बार फिर सोमवार को सेक्सुअल रिलेशनशिप (Sexual Relationships) में शामिल टीनएजर्स से जुड़े मामलों में ‘प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट, 2012’ (POCSO एक्ट) के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि 15 से 18 साल के उम्र के बच्चे आपसी सहमति से संबंध बनाते हैं और घर छोड़ देते हैं। जब ये टीनएज लड़कियां अपने पार्टनर के साथ भाग जाती हैं, तो माता-पिता अक्सर अपनी तथाकथित इज्जत बचाने के लिए POCSO एक्ट के तहत आपराधिक कार्रवाई का सहारा लेते हैं।
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बार एंड बेंच की रिपोर्ट (Bar & Bench report) के मुताबिक, कोर्ट ने पूछा कि सरकार किसी लड़की और लड़के के भागने को कैसे रोक सकती है? POCSO बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न और शोषण से जुड़ा है। 15-18 साल की उम्र संवेदनशील होती है। यह उम्र कुछ नया आजमाने की होती है। सवाल यह है कि क्या यह वाकई POCSO का मामला बनता है?
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, कोर्ट किशोरों के निजता के अधिकार से जुड़े एक स्वतः संज्ञान (Suo Motu) वाले मामले की सुनवाई कर रहा था। यह मामला कलकत्ता हाई कोर्ट (Calcutta High Court) के उस फैसले के बाद शुरू हुआ था, जिसमें किशोर लड़कियों से कहा गया था कि वे रिश्तों में उलझने और “दो मिनट के सुख के लिए झुकने” के बजाय अपनी यौन इच्छाओं पर “काबू” रखें। बाद में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने हाई कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया था। इस मामले में आज, सीनियर एडवोकेट माधवी दीवान ने कोर्ट को उस मामले की मौजूदा स्थिति के बारे में बताया जिसकी वजह से कलकत्ता हाई कोर्ट (Calcutta High Court) का विवादित फैसला आया था।
नाबालिगों को पुनर्वास के कुछ उपाय पाने का अधिकार है
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सीनियर वकील दीवान ने कहा, कि यह मामला एक नाबालिग लड़की के 25 साल के युवक के साथ भागने से जुड़ा था। उस खास मामले को सुलझा लिया गया था। मोटे तौर पर मामला खत्म हो गया था। कोर्ट ने एक कमेटी बनाई थी। सोशल वर्करों ने उस लड़की से बात की थी। POCSO मामलों में सिस्टम की विफलता को लेकर एक मजबूत रिपोर्ट दाखिल की गई थी।” दीवान ने आगे कहा कि POCSO एक्ट के तहत नाबालिगों को पुनर्वास के कुछ उपाय पाने का अधिकार है।
रोकने के लिए एक सिस्टम की ज़रूरत कोर्ट ने पूछा कि क्या यह भागने का मामला था या अपहरण का। दीवान ने कहा कि पीड़िता उस आदमी के साथ रहना चाहती थी और उससे उसका एक बच्चा भी है। इसके बाद कोर्ट ने POCSO एक्ट के गलत इस्तेमाल के बारे में एक सामान्य टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि 16-18 साल की उम्र में वे रिश्ता बनाते हैं और भाग जाते हैं। माता-पिता अपनी इज्जत बचाने के लिए आपराधिक मामला दर्ज करा देते हैं। हमें उन्हें बरी करना पड़ता है। इसी बीच, दीवान ने कहा कि ऐसी समस्याओं को रोकने के लिए एक सिस्टम की जरूरत है।
केंद्र सरकार ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि लड़की पहले ही अपने पति के साथ बस चुकी है और खुश है। बड़ा मुद्दा किशोरों की भलाई और बच्चों की सुरक्षा के लिए उपाय अपनाना है। दीवान ने उन मामलों का भी ज़िक्र किया जिनमें 17-18 साल के युवाओं को जेल भेज दिया जाता है। उन्होंने कहा कि कम उम्र में ही संवेदनशीलता लाने की ज़रूरत है। केंद्र सरकार ने व्यापक सुझाव दिए हैं। उन्हें तार्किक नतीजे तक पहुँचाने की जरूरत है। केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि किशोरों के लिए कक्षा 6 से चरणबद्ध तरीके से POCSO और यौन शिक्षा संबंधी जागरूकता शुरू करने का प्रस्ताव है। इससे बच्चों को कानून, सुरक्षा और उनके अधिकारों की बेहतर जानकारी मिल सकेगी।