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‘I Hate Myself’ ये है बेरोजगारी का भयावह सच, बीटेक गोल्ड मेडलिस्ट सुसाइड नोट लिख माता-पिता को दे गया जीवन भर की टीस

By santosh singh 
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कानपुर। ‘सॉरी पापा, मैंने 50 बार कोशिश की…’, लेकिन मैं सफल नहीं हो पाया। पापा मुझे माफ करना.. सॉरी।’ अंग्रेजी में यह सुसाइड नोट (Suicide Note) लिखकर बीटेक गोल्ड मेडलिस्ट (B.Tech Gold Medalist) मूलरूप से बिहार के बक्सर के रहने वाले 23 वर्षीय आनंद कुमार (Anand Kumar) ने पंखे से फंदा लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। उसने एक नोट छोड़ा जिसमें उसने बार-बार कोशिश करने के बावजूद सरकारी नौकरी न मिल पाने के लिए अपने पिता से माफ़ी मांगी है।

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‘I Hate Myself’  ये शब्द बेरोजगारी के वह भयावह सच है, जो आनंद कुमार के परिजनों खासकर माता-पिता को जीवन भर टीस देता रहेगा। ये शब्द उन हजारों, लाखों नहीं करोड़ों बच्चों को मानसिक रूप से तोड़ रहा है। आत्महत्या से पहले युवक ने एक 5 लाइन का दिल दहला देने वाला सुसाइड नोट (Suicide Note) में उसने 7 से 8 बार ‘सॉरी’ लिखा था। अपने पिता से माफी मांगते हुए उसने लिखा, ‘सॉरी पापा, मैंने सरकारी नौकरी के लिए 50 बार कोशिश की, लेकिन मैं सफल नहीं हो सका, प्लीज मुझे माफ कर दीजिए।

अक्सर शासन सत्ता में बैठे लोगों की तरफ से कहा जाता है कि योग्यता नहीं थी इसलिए नौकरी नहीं मिलती। प्रदेश में तीसरे नंबर का टॉपर , जिसे खुद प्रदेश के राज्यपाल आनंदी बेन पटेल (Governor Anandiben Patel) ने सम्मानित किया हो और जिसने प्रदेश के नंबर वन कॉलेज से इंजीनियरिंग की हो। पूरे प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल करने पर बीटेक गोल्ड मेडलिस्ट (B.Tech Gold Medalist)  हर बार क्यूं असफल हो रहा है? ये हमारी शिक्षा प्रणाली व सरकार की कार्यशैली बड़ा सवालिया निशान है?

प्रदेश में तीसरे नंबर का टॉपर हो, जिसे खुद प्रदेश के राज्यपाल ने सम्मानित किया,वह सरकारी नौकरी के लिए दर-दर की ठोकरे खाए यह समझ से परे

समाज में काफी बदलाव होने के बावजूद आज भी सरकारी नौकरी का क्रेज हर युवा के सिर चढ़कर बोलता है, लेकिन कभी-कभी यही चाहत किसी ऐसे होनहार की जान ले लेती है, जो प्रदेश में तीसरे नंबर का टॉपर हो, जिसे खुद प्रदेश के राज्यपाल ने सम्मानित किया हो और जिसने प्रदेश के नंबर वन कॉलेज से इंजीनियरिंग की हो। वह सरकारी नौकरी के लिए दर-दर की ठोकरे खाए यह समझ से परे है।

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घटना के समय दिवंगत के पिता परिवार समेत बड़े बेटे की शादी तय करने बिहार गए थे। लोहिया स्टारलिंगर कंपनी से सेवानिवृत्त राजकुमार मूलतः बिहार के बक्सर के रहने वाले हैं। परिवार में दो बेटे अमित व आनंद और बेटी प्रिया है। आनंद ने पीएसआईटी कॉलेज से 2024 में इलेक्ट्रिकल से बीटेक किया था। प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल करने पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 13 अगस्त, 2024 को उन्हें गोल्ड मेडल प्रदान किया था। वह शहर में एक निजी कंपनी में नौकरी भी कर रहे थे।

बड़ा बेटा अमित, बेटी प्रिया बक्सर में सरकारी शिक्षक हैं। पिता राजकुमार ने बताया कि आनंद ने रेलवे, एसएससी, बैंकों व शिक्षा विभाग की भर्ती परीक्षाओं में हिस्सा लिया, पर सफल न हो सका। वह गत कई माह से तनाव में था। परिवार के लोग पांच दिन पहले बड़े बेटे अमित की शादी के लिए लड़की देखने गए थे। आनंद को भी साथ जाना था, पर उसने मना कर दिया। शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे नौकरानी घर में काम करने पहुंची तो काफी देर तक दरवाजा नहीं खुलने पर उसने परिजनाें व पुलिस को जानकारी दी। पुलिस दरवाजा तोड़कर घर में घुसी तो शव फंदे पर लटका मिला।

सुसाइड की सूचना मिलने पर परिवार के लोग बिहार से कानपुर पहुंचे। पोस्टमार्टम हाउस में बेटे का शव देखकर पिता बार-बार यही कहते रहे, “ऐसा कैसे हो गया? सरकारी नौकरी नहीं थी तो क्या हुआ, वह प्राइवेट नौकरी तो कर ही रहा था। हमें अकेला छोड़कर क्यों चला गया?

डीसीपी डीएन चौधरी का कहना है कि एक युवक के सुसाइड करने की सूचना मिली थी। उसके पास से सुसाइड नोट मिला है। उसे देखकर लगता है कि वह डिप्रेशन से परेशान था। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

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