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भारत में महिलाओं के मुकाबले पुरुषों अधिक करते हैं सुसाइड, डॉक्टरों ने बताई हैरान करने वाली वजह

By प्रिन्सी साहू 
Updated Date

पिछले कुछ दिनों में खबरों में पुरुषों के आत्महत्या के मामलों में तेजी देखी जा रही है। एनसीआरबी के एक बेटा ने एक्सपर्ट को पुरुषों में बढ़ती मेंटल हेल्थ को लेकर चिंता में डाल दिया है और उनका कहना है इस पहलू को अधिकतर नजरअंदाज कर दिया जाता है। वरिष्ठ मनोचिकित्सक ज्योति कपूर के अनुसार पुरुषों को अक्सर अपनी कमजोरी को दबाने के लिए तैयार किया जाता है।

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जिसकी वजह से वह इसका शिकार होते चले जाते है। कई मामलों में परिणाम आत्महत्या ही होता है। डॉ कपूर के अनुसार पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य को समझना और सहयोग करना पहले कभी इतना महत्वपूर्ण नहीं रहा। हमें मेंटल हेल्थ संबंधी बातचीत को सामान्य बनाना चाहिए।

सुलभ चिकित्सा संसाधन उपलब्ध कराने चाहए और ऐसे वातावरण को बढ़ाना देना चाहिए जो घर और कार्यस्थल दोनो जगह बिना रिी निर्णय के भावनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करें।

पुरुषों के खिलाफ अत्याचार की घटनाएं जिनमें झूठे आरोपस भावनात्मक दुर्व्यहार से लेकर घरेलू हिंसा और कानूनी उत्पीड़न तक शामिल है। न केवल महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक आघात का कारण बनते है बल्कि पुकुषों के मानसिक स्वास्थ्य की व्यवस्थित उपेक्षा को भी दर्शाते है।

एक वेबसाइट में प्रकाशित लेख के अनुसार हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में किए गए एक रिसर्च से यह भी पता चला कि 52.4 फीसदी विवाहित पुरुषों ने बिना किसी कानूनी सहारे या मनोवैज्ञानिक सहायता के लिंग आधारित हिंसा का अनुभव किया। रिसर्च के अनुसार समाज पुरुषों के दर्द को अनदेखा करना जारी रखे हुए है और समय की मांग है कि इसमें तत्काल सुधार किए जाएं।

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क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक कि 2013-14 के एक रिसर्च में पाया गया कि उस अवधि के दौरान दर्ज किए गए दुष्कर्म के 53.2 फीसदी आरोप झूठे थे, जिससे मनोवैज्ञानिकों और कानूनी एक्सपर्ट में झूठे आरोप का शिकार होने वालों पर पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक प्रभाव को लेकर चिंता पैदा हो गई। इसके परिणामस्वरूप अक्सर नैदानिक ​​अवसाद, चिंता, तनाव संबंधी विकार और दीर्घकालिक भावनात्मक आघात का सामना करना पड़ता है।

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