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5000 KM दूर से दागी गई मिसाइल को भी हवा में मार गिराएगा भारत, DRDO का बड़ा परीक्षण

By Harsh 
Updated Date

भारत ने अपनी मिसाइल रक्षा क्षमता को एक नए स्तर पर पहुंचाते हुए मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम का सफल प्रदर्शन किया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 10 और 11 जून को लगातार तीन फ्लाइट टेस्ट किए, जिनसे यह साबित हुआ कि देश अब लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों, यहां तक कि इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) श्रेणी के खतरों का भी मुकाबला करने में सक्षम है।

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह  ने 13 जून को परीक्षण से जुड़ी तस्वीरें साझा करते हुए इसे भारत की रक्षा तैयारियों के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। इसके साथ ही नेवल एंटी-शिप मिसाइल (मीडियम रेंज) का भी सफल परीक्षण किया गया, जिससे देश की समुद्री सुरक्षा क्षमता को और मजबूती मिली है।

क्या है ICBM और क्यों माना जाता है बड़ा खतरा?

इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल यानी ICBM ऐसी मिसाइल होती है जो एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक हमला करने की क्षमता रखती है। आमतौर पर इसकी मारक क्षमता 5,500 किलोमीटर से अधिक होती है। ये मिसाइलें अत्यधिक ऊंचाई तक पहुंचने के बाद पृथ्वी की ओर लौटती हैं और बेहद तेज गति से अपने लक्ष्य पर हमला करती हैं। कई ICBM परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम होती हैं, इसलिए इन्हें दुनिया के सबसे रणनीतिक और खतरनाक हथियारों में गिना जाता है।

कैसे काम करती है भारत की मल्टी-लेयर्ड BMD प्रणाली?

इस रक्षा प्रणाली का उद्देश्य दुश्मन की मिसाइल को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट करना है। सबसे पहले अत्याधुनिक रडार आने वाली मिसाइल का पता लगाते हैं। इसके बाद कमांड सेंटर खतरे का विश्लेषण करता है और इंटरसेप्टर मिसाइल को लॉन्च किया जाता है। यह इंटरसेप्टर हवा में ही दुश्मन की मिसाइल को निशाना बनाकर खत्म कर देता है।

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इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसकी ‘मल्टी-लेयर’ सुरक्षा है। यदि पहली इंटरसेप्टर मिसाइल लक्ष्य को नष्ट करने में विफल रहती है, तो दूसरी सुरक्षा परत सक्रिय हो जाती है। इससे दुश्मन की मिसाइल के बच निकलने की संभावना बेहद कम हो जाती है।

चुनिंदा देशों की सूची में भारत

विशेषज्ञों के अनुसार, इस उपलब्धि के बाद भारत उन गिने-चुने देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जिनके पास ऑपरेशनल स्तर की बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस क्षमता मौजूद है। इससे पहले ऐसी तकनीक अमेरिका, रूस, इजराइल और चीन जैसे देशों के पास ही थी। हालिया सफल परीक्षण भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक और रणनीतिक ताकत का बड़ा प्रमाण माना जा रहा है।

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