लखनऊ। सुल्तानपुर में हुई जल जीवन मिशन ग्रामीण के अधिशासी अभियंता संंतोष कुमार की हत्या का मामला गरमाता जा रहा है। इस हत्याकांड की अब उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मांग होने लगी है। भाई का आरोप है कि, बीते 15 अगस्त को उनकी बात हुई थी, जिसमें उन्होंने जल जीवन मिशन के अंतर्गत काम करने वाली एजेंसी को ब्लैक लिस्ट व 250 पेज की चार्जशीट बनाने की बात कही थी। उन्होंने आशंका जताई है कि, इसी जांच व पेमन्ट के भुगतान के लिए मेरे भाई की हत्या की गयी है। ऐसे में अब सवाल उठने लगा है कि, क्या जल जीवन मिशन को भ्रष्टाचार ने पूरी तरह से जकड़ लिया है, जिसके कारण इस तरह की सनसीनखेज वारदात हो रही है।
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दरअसल, जल जीवन मिशन में काम कर रही कंपनियों और कुछ अधिकारियों को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं, जो सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना में भ्रष्टाचार करने में जुटे हुए हैं। ऐसे में ये महत्वाकांक्षी योजना कैसे परवान चढ़ पाएगी। सूत्रों की माने तो इस तरह के भ्रष्टाचार की पठकथा विभाग के बड़े अफसर और उनके कुछ करीबी मिलकर लिख रहे हैं। यही नहीं अफसर कंपनियों से भारी कश्मीन भी ले रहे हैं।
बताया जा रहा है कि, हर घर स्वच्छ जल पहुंचाने के लिए जिन कंपनियों को काम दिया गया है, वो काफी लापरवाही बरत रही हैं। मानक के विपरित काम करने के बाद भी कुछ अफसरों की मिलीभगत से उनका आसानी से भुगतान हो जा रहा है, जिसके बाद अफसर कंपनियों से मोटी रकम भी वसूलते हैं।
सिर्फ कागजों में पूरे हो रहे दावे
‘हर घर को नल से जल’ पहुंचाने का दावा सिर्फ कागाजों में ही पूरा हो रहा है, जबकि इसकी जमीनी हकीकत इससे काफी दूर है। इससे साफ है कि, उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस महत्वाकांक्षी योजना में प्रमुख सचिव नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग अनुराग श्रीवास्तव सिर्फ आंकड़े पेश कर रहे हैं, जबकि जमीनी पर वो काम करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। प्रमुख सचिव अनदेखी के कारण ही यूपी के ज्यादातर गांवों में ये योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है और लोगों को शुद्ध जल नहीं मिल पा रहा है।