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इस मंदिर में खिड़की से होते हैं भगवान के दर्शन , जानें अनोखी परंपरा की पूरी कहानी

By अनूप कुमार 
Updated Date

Krishna Temple Udupi : भारत में भगवान के प्रति आस्था और उनका दर्शन पाने के लिए  भक्तगण कठिन जप,तप साधना करते है। मंदिरों में जाकर भगवान की विधिवत पूजा अर्चना करते हैं और उनको भोग प्रसाद अर्पित करते है। इस देश में प्राचीन काल से ही विशाल और भव्य मंदिर बने हुए है। हर मंदिर के बनने के पीछे सत्य घटना की कहानियां और मान्यताएं
है। इसी प्रकार कर्नाटक प्रांत का उडुपी मंदिर है। यह स्थान श्री कृष्ण मंदिर भक्तों की आस्था और चमत्कारों का प्रतीक है। अन्य मंदिरों की परंपरा के विपरीत इस मंदिर की सबसे अनोखी बात यह है कि यहां भगवान श्री कृष्ण के दर्शन एक छोटी खिड़की से किए जाते हैं।

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मंदिर की स्थापना की बात करें तो इस धार्मिक स्थल को 13वीं शताब्दी में श्री माधवाचार्य ने बनवाया था। यह मंदिर कर्नाटक के उडुपी में स्थित है और भगवान कृष्ण को समर्पित है। यहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां भगवान कृष्ण के दर्शन और पूजा करने आते हैं। इस मंदिर में भगवान कृष्ण की सबसे सुंदर मूर्ति मानी जाती है, जिसमें वे अपने बचपन के स्वरूप बालकृष्ण के रूप में विराजमान हैं। इस मंदिर में कोई भी सीधे मूर्ति के दर्शन नहीं कर सकता। भगवान कृष्ण के दर्शन यहां आपको 9 छिद्रों वाली एक छोटी खिड़की से होते हैं। यह मंदिर अपने आप में बहुत ही अनोखा और रोचक और कहानियां समेटे हुए है। यहां भगवान कृष्ण के दुर्लभ दर्शन के पीछे मान्यता है कि भगवान ने अपने एक भक्त की भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं यह खिड़की बनवाई थी ताकि हर कोई उनके दर्शन कर सके। जन्माष्टमी में मंदिर में काफी भीड़ लगती है और भगवान श्रीकृष्ण की एक झलक पाने के लिए श्रद्धालुओं को घंटों इंतजार करना पड़ता है।

एक दूसरी मान्यता 
एक दूसरी मान्यता के अनुसार  , एक बार श्री माधवाचार्य ने समुद्र के तूफान में फंसे एक जहाज को अपनी दिव्य शक्तियों से बचाया था। जब जहाज किनारे आया तो उसमें श्री कृष्ण की मूर्ती मिली। यह मूर्ति समुद्र की मिट्टी से ढकी थी। इसके बाद माधवचार्य ने उस मूर्ती को उडुपी लाकर मंदिर में स्थापित कर दिया।

“पर्याय महोत्सव”
इसी प्रकार इस मंदिर की परंपरा के अनुसार, मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु फर्श में रखकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस प्रसाद को प्रसादम या नौवैद्यम कहा जाता है। यह मंदिर सुबह 4:30 बजे खोला जाता है। इस वक्त सिर्फ मठ के लोग ही मंदिर में दर्शन करते हैं। इसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर सुबह 5 बजे से खुलता है और रात 10 बजे तक खुला रहता है। इसके अलावा, मंदिर में हर दो साल में “पर्याय महोत्सव” मनाया जाता है, जिसमें मंदिर की पूजा और प्रबंधन की जिम्मेदारी एक मठ से दूसरे मठ को सौंप दी जाती है।

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कैसे पहुंचे यहां
सबसे नजदीकी एयरपोर्ट मंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जो मंदिर से 59.1 किमी दूर है। वहां से टैक्सी लेकर सीधे मंदिर पहुंच सकते हैं। वहां से, आप सीधे टैक्सी के जरिए मंदिर तक पहुंच सकते हैं। उडुपी रेलवे स्टेशन मंदिर से सिर्फ 3.2 किमी दूर है, वहां से, आप मंदिर तक पहुंचने के लिए टैक्सी या ऑटो किराए पर ले सकते हैं। आप अपनी गाड़ी से या फिर सरकारी और प्राइवेट बसों से भी मंदिर पहुंच सकते हैं।

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