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हम अपनी राजनीतिक ताकत पहचान लें तो लाखों सरकारी नौकरियां सीधे निषाद-कश्यप समाज के नौजवानों के घरों में होंगी: संजय निषाद

लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत सही दिशा में दबाया गया 'बटन' है। साइकिल वालों ने अपनी ताकत पहचानी, बटन दबाया और लाखों नौकरियां अपने घरों में ले गए। हाथी वालों ने मान्यवर कांशीराम जी की सीख समझी-जिस डंडे से कभी बेबसी झेलते थे, उस पर अपना झंडा बांध लिया और आज उनके हर गांव में दर्जनों सरकारी नौकरियां हैं।

By शिव मौर्या 
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प्रयागराज। निषाद समाज पार्टी के प्रमुख और यूपी सरकार के मंत्री संजय निषाद ने रविवार को प्रयागराज में एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि, आज प्रयागराज में आयोजित “संवैधानिक निषाद/मछुआ एस.सी. आरक्षण अधिकार विशाल सम्मेलन”में उपस्थित लाखों देवतुल्य समाज के भाइयों, माताओं और युवाओं का मैं हृदयतल से वंदन और आभार व्यक्त करता हूं। यह जनसैलाब प्रमाण है कि अब मछुआरा समाज जाग चुका है और अपने अधिकारों के लिए पूरी तरह लामबंद है।

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उन्होंने कहा, लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत सही दिशा में दबाया गया ‘बटन’ है। साइकिल वालों ने अपनी ताकत पहचानी, बटन दबाया और लाखों नौकरियां अपने घरों में ले गए। हाथी वालों ने मान्यवर कांशीराम जी की सीख समझी-जिस डंडे से कभी बेबसी झेलते थे, उस पर अपना झंडा बांध लिया और आज उनके हर गांव में दर्जनों सरकारी नौकरियां हैं।

अब मैं आपसे पूछता हूं-जिस डंडे से आप नदी में जाल और कटिया लगाते हैं, उस पर दूसरों की गुलामी का झंडा कब तक ढोओगे? उस पर अपने स्वाभिमान का झंडा लगाओ। हमें दारू और चंद प्रलोभनों में नहीं बिकना, हमें अपने बच्चों के लिए सम्मान, सरकारी खजाना और पक्की नौकरी चाहिए। उत्तर प्रदेश में हमारी 18% आबादी है, अगर हम अपनी राजनीतिक ताकत पहचान लें तो लाखों सरकारी नौकरियां सीधे निषाद-कश्यप समाज के नौजवानों के घरों में होंगी। इसके लिए किसी को बंदूक उठाने की जरूरत नहीं, बस अपने वोट और सही बटन की ताकत समझनी होगी। यह संघर्ष मैंने किसी पद या आराम के लिए नहीं किया।

संजय निषाद ने कहा, आपके हक की लड़ाई लड़ते हुए मैंने 7 महीने जंगलों में काटे, हमारे 37 बेकसूर साथी जेलों में बंद किए गए, और आज भी मुझ पर 302 का मुकदमा चल रहा है। समाज के सामने साफ कर देना चाहता हूं-अगर समाज के हक के लिए मुझे फांसी पर भी चढ़ना पड़ा, तो हंसते-हंसते चढ़ जाऊंगा, लेकिन आपका संवैधानिक हिस्सा लिखवा कर ही दम लूंगा। हमारी मांग बिल्कुल स्पष्ट और संवैधानिक है: मछुआ समाज को ओबीसी में उलझाकर रखना बंद किया जाए।

1950 की राष्ट्रपति अधिसूचना के अनुसार उत्तर प्रदेश की अनुसूचित जाति (SC) सूची में दर्ज मझवार’ (क्रमांक 53) और ‘तुरैहा’ (क्रमांक 66) के तहत समाज की सभी उपजातियों को उनका वास्तविक अनुसूचित जाति (SC) प्रमाण पत्र तत्काल और निर्विवाद रूप से जारी किया जाए। यह लड़ाई केवल चुनावी भाषणों की नहीं, बल्कि तथ्यों और ठोस संवैधानिक प्रक्रिया के साथ लड़ी जाने वाली आर-पार की लड़ाई है। निषादराज गुह्य के वंशज अब अपने पूर्ण संवैधानिक अधिकारों को हासिल किए बिना न रुकेंगे, न थकेंगे।

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