Mauni amavasya 2025 : आस्था का महापर्व महाकुंभ में करोड़ों की संख्या में लोग आज संगम में डुबकी लगा रहे हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, स्नान के बाद लोगों को सूर्य देव, अपने पितरों और शिवलिंग पर जलाभिषेक जरूर करना चाहिए। आज दूसरे अमृत स्नान का शुभ योग के दिन श्रद्धालु बड़ी संख्या में प्रयागराज पहुंच रहे हैं। साथ ही मौनी अमावस्या तिथि के कारण आज स्नान के बाद पितरों को जल जरूर अर्पित करना चाहिए। मौनी अमावस्या पर स्नान का शुभ मुहूर्त 5.25 से 6.18 तक है।
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सही दिशा दिशा में मुख कर जल दें
धार्मिक मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन देव गण और पितृदेव धरती पर वास करने आते हैं। ऐसे में स्नान के बाद पितरों को जल अर्पित जरूर करना चाहिए। इसके साथ ही यह भी याद रहे कि जल अर्पित करने के लिए सही दिशा होनी चहिए। दक्षिण दिशा में मुख कर अपने पितरों को जल देना चाहिए। बता दें कि दक्षिण दिशा में पितरों का वास माना गया है। साथ ही यह दिशा यम को समर्पित है।
देवी देवताओं को जल दें
शास्त्रों में माना गया है कि ईशान कोण जो है वह देवी-देवताओं को समर्पित है। ऐसे में यदि आप देवी-देवताओं को जल अर्पित कर रहे हैं तो ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुंह कर जल दें। इससे आपके भाग्य खुल जाएंगे।
सूर्य देव को जल देने की दिशा
अगर आप सुबह स्नान कर रहे तो आपको सूर्य को उगते हुए दिशा यानी पूर्व दिशा में देना चाहिए और यदि शाम हो चुकी है तो आपको सूर्य के अस्त होने के दौरान पश्चिम दिशा में जल देना चाहिए।
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भगवान विष्णु की आराधना करें
ऐसे में श्रद्धालु संगम तट पर पवित्र नदी में डुबकी लगा रहे हैं। यदि नदी में स्नान संभव न हो तो नहाने के बाद गंगाजल अपने ऊपर जरूर छिड़क लें। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु की आराधना करें। साथ ही तुलसी माता की 108 बार परिक्रमा करें।