मेरठ। मेरठ में सपा नेताओं के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आने के बाद पुलिस विभाग में कार्रवाई हुई है। नए एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने कार्यभार संभालने के तुरंत बाद इंस्पेक्टर समेत 8 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया। मामले की जांच सहारनपुर डीआईजी अभिषेक सिंह को सौंपी गई है।
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इससे पहले गुरुवार देर रात शासन ने 9 आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए थे। इसी फेरबदल में मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडेय को पद से हटाकर लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय से अटैच कर दिया गया था। मामला सामने आने के बाद एडीजी मेरठ भानु भास्कर ने जांच की जिम्मेदारी सहारनपुर डीआईजी को दी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुनाई आपबीती
शुक्रवार को सपा नेताओं दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। दिग्विजय भाटी की आंख पर पट्टी बंधी थी। उन्होंने अपनी चोट दिखाते हुए पुलिसकर्मियों पर मारपीट का आरोप लगाया। उनका दावा है कि उन्हें और मोहित को पहले एसएसपी के चैंबर में पीटा गया और बाद में पुलिस लाइंस स्थित एसओजी कार्यालय ले जाया गया।
दिग्विजय के मुताबिक वहां भी दोनों के साथ मारपीट की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जब वे बेहोश हो जाते थे तो पुलिसकर्मी उन्हें होश में लाकर दोबारा पीटते थे। उन्होंने यह भी कहा कि रात करीब 2 बजे अतुल प्रधान के पहुंचने के बाद उन्हें छोड़ा गया।
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‘40 रुपये का कुर्ता-पायजामा पहनकर नेता बन जाते हो’
दिग्विजय भाटी ने आरोप लगाया कि 19 अगस्त को वह अपने जिलाध्यक्ष मोहित जाटव के साथ एसएसपी अविनाश पांडेय से मिलने पहुंचे थे। उनका कहना है कि दोनों ललिता गौतम हत्याकांड के विरोध में हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में जेल भेजे गए 8-10 लोगों को लेकर अपनी बात रखने गए थे।
भाटी के अनुसार उन्होंने एसएसपी के सामने सफाई देने की कोशिश की तो अधिकारी नाराज हो गए। आरोप है कि इसी दौरान उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया और कहा गया कि 40 रुपये का कुर्ता-पायजामा पहनकर नेता बन जाते हैं, हमसे टकराएंगे? विरोध करने पर दोनों को कथित तौर पर चैंबर के अंदर ले जाकर पीटा गया।
इसके बाद दिग्विजय का आरोप है कि सिविल लाइंस इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ को दोनों को एसओजी कार्यालय ले जाने के लिए कहा गया। वहां बंद कमरे में उनके हाथ-पैर बांधकर डंडों से मारने का आरोप लगाया गया।
गाना बजाकर नचाने का भी आरोप
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प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिग्विजय भाटी ने पुलिसकर्मियों पर अमानवीय व्यवहार का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि पुलिसकर्मियों ने मोबाइल पर एक चोली के पीछे क्या है गाना बजाया और दोनों से उस पर नाचने को कहा। भाटी का कहना है कि मारपीट के बाद उनकी हालत ऐसी थी कि वे ठीक से खड़े तक नहीं हो पा रहे थे फिर भी उन्हें नाचने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान पुलिसकर्मी उन पर हंसते रहे और उनके हाथ जोड़कर रहम की अपील करने के बावजूद मारपीट बंद नहीं की गई। साथ ही उन्होंने दावा किया कि उन्हें धमकी दी गई थी कि अगर घटना की जानकारी मीडिया तक पहुंची तो उनके साथ और बुरा व्यवहार किया जाएगा।