नई दिल्ली। Narendra Modi and Xi Jinping will meet after seven years: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा कर लगातार दबाव बनाना चाह रहे है। अमेरिका के इस कदम के बाद भी भारत किसी तरह के दबाव में नही आया। अब अतियानजिन में होने वाला शिखर सम्मेलन एशिया में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सात सात बादा मुलाकात करेंगे। यह मुलाकात भारत और चीन के रिश्ते को नया मोड़ दे सकती है।
चीन के तियानजिन शहर में 31 अगस्त से एक सितंबर तक शंघाई सहयोग संगठन का शिखर सम्मेलन का अयोजन होने जा रहा है। इस सम्मेलन में भारत, रूस, पाकिस्तान, कजाखस्तान, किर्गिजस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान, बेलारूस और तुर्की समेत 20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष हिस्सा ले रहे है। इसके साथ ही दस अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। यह शिखर सम्मेलन पिछले दस वर्षों में होने वाला सबसे बड़ा सम्मेलन है। इस मंच के माध्यम से चीन अमेरिका को दिखाना चाहता है कि अब वह दुनिया का अकेला सुपरपावर नहीं है और वैश्विक राजनीति में पश्चिमी देशों के खिलाफ एक नया खेमा तैयार हो चुका है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी-पुतिन की जोड़ी की मौजूदगी से पूरी दुनिया का ध्यान खींच रही है और साथ में चीन भी अपने दुश्मनों को साफ संदेश देगा।
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अपनी आर्थिक और राजनीतिक ताकत दिखाना चाहता है चीन
चीन इस सम्मेलन के माध्यम से दुनिया को अपनी अपनी आर्थिक और राजनीतिक ताकत दिखाना चाहता है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग यह साबित करना चाहते हैं कि पश्चिमी दबाव का असर अब सीमित हो गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लगाया था, जिसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ा। वहीं, रूस पर अमेरिकी दबाव भी कमजोर पड़ा है। ऐसे माहौल में चीन को पश्चिमी प्रभाव के विकल्प के रूप में पेश करेगा।
भारत और चीन के बीच कम हो रहा है आपसी तनाव
भारत और चीन के बीच पिछले कुछ महीनों से आपसी तनाव कम हो रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, रक्षा और विदेश मंत्रियों के बीच बैठकें हुईं है। सीमा प्रबंधन के लिए नई संचार प्रणाली और विशेषज्ञ समूह बनाए गए। प्रत्यक्ष उड़ानें फिर से शुरू हुईं और कैलाश-मानसरोवर यात्रा को दोबारा अनुमति दी गई। चीन से दुर्लभ खनिज और उर्वरक का निर्यात भी बहाल हुआ, लेकिन दोनों देशों में आपसी विश्वास की कमी अभी भी बरकरार है।
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मल्टी-अलाइनमेंट नीति को आगे बढ़ा रहा है भारत
मल्टी-अलाइनमेंट की नीति को भारत आगे बढ़ाने में जुटा हुआ है। मोदी इस सम्मेलन से पहले जापान-भारत वार्षिक बैठक में भी शामिल होंगे। इसका मकसद यह संदेश देना है कि भारत न तो पूरी तरह अमेरिका के पक्ष में है और न ही चीन के सामने झुकने वाला है। यह मंच भारत को यह दिखाने का अवसर देगा कि वह स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करता है।
सम्मेलन में आतंकवाद पर सख्त रुख अपनाएगा भारत
भारत इस सम्मेलन में आतंकवाद पर सख्त रुख अपनाने वाला है। हाल ही में भारत ने एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक में साझा बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था क्योंकि उसमें आतंकवाद को लेकर पर्याप्त कठोर भाषा नहीं थी। पाकिस्तान की मौजूदगी में भारत यह मुद्दा मजबूती से उठाएगा।