कैलिफोर्निया। सामरिक और व्यापारिक दृष्टि से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक, ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ‘डोनाल्ड ट्रंप’ ने संकेत देते हुए कहा है कि जल्द ही इस पर एक बड़ा समझौता हो सकता है। कैलिफोर्निया में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने खुलासा किया कि ओमान और ईरान के साथ चल रही त्रिपक्षीय राजनयिक बातचीत में बड़ी प्रगति दर्ज की गई है।
पढ़ें :- मोदी सरकार के FCRA बिल पर भड़का ट्रंप का सांसद, बोला- यह ईसाइयों पर हमला
हालांकि, इस सकारात्मक संकेत के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी आक्रामक शैली में ईरान को कड़ी चेतावनी भी दी। ट्रंप ने कहा कि इस समझौते की दिशा में काफी जमीनी काम हो चुका है, लेकिन अगर ईरान अंतिम समय पर बातचीत से पीछे हटने की कोशिश करता है, तो अमेरिकी सेना उस पर भीषण और भारी हमला करेगी।
क्या है प्रस्तावित 60 दिवसीय फॉर्मूला?
राजनयिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस तनाव को कम करने के लिए एक 60 दिवसीय अस्थायी समझौते का खाका तैयार किया गया है। आपको बता दें कि इस योजना में वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था का जिक्र की गई हैं। इसमें वाणिज्यिक और तेल टैंकर जहाजों को फारस की खाड़ी में प्रवेश करने के लिए ईरानी समुद्री लेन का उपयोग करना होगा। इसके अलावा खाड़ी से बाहर निकलने वाले सभी जहाजों को ओमान की समुद्री लेन के माध्यम से सुरक्षित निकाला जाएगा।
इन दो मुद्दों पर अभी भी फंसा है पेंच
पढ़ें :- Maritime Security : समंदर में सुरक्षा के लिए सऊदी ने बनाया देशों का गठबंधन, ये देश नहीं आए साथ
दो मुख्य बिंदुओं पर अभी भी दोनों पक्षों के बीच रूकावट बना हुआ है। इसमें पहला है ईरान का ट्रांजिट शुल्क। ईरान अपने समुद्री क्षेत्र से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों पर भारी ट्रांजिट फीस लगाने की मांग कर रहा है, जिसे अमेरिका और उसके सहयोगी स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। यदि दूसरे मुख्य बिन्दु की बात करें तो वहा है अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी। ईरान ने शर्त रखा है कि अमेरिकी नौसेना तुरंत उसके बंदरगाहों की आर्थिक और सैन्य नाकेबंदी पूरी तरह से हटाए, जिसकी शर्तों और समयसीमा पर वॉशिंगटन में मंथन चल रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
फिलहाल, इस जलमार्ग के खुलने की उम्मीद का असर दुनिया भर के बाजारों पर तुरंत देखने को मिला है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतों में 1.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, दुनिया की कुल पेट्रोलियम आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा यानी 20 प्रतिशत इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में खाड़ी देश में तनाव कम होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति अच्छे से सुचारू होगी। इसकी वजह से भारत सहित दुनिया के कई बड़े देशों को महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों से बड़ी राहत मिल सकती है।