पश्चिम एशिया में पहले से जारी अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच अब यमन का मोर्चा भी तेजी से गरमाता दिख रहा है। ईरान समर्थित हूती लड़ाकों और सऊदी अरब के बीच हमलों का सिलसिला बढ़ने से पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। दरअसल, यमन में हूती विद्रोहियों और सरकारी बलों के बीच हालिया लड़ाई तेज हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक हूती लड़ाकों ने लाल सागर के तट और बाब-अल-मंदेब के आसपास रणनीतिक इलाकों में अपनी पकड़ को मजबूती से बढ़ाई है।
West Asia Conflict: पश्चिम एशिया में पहले से जारी अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच अब यमन का मोर्चा भी तेजी से गरमाता दिख रहा है। ईरान समर्थित हूती लड़ाकों और सऊदी अरब के बीच हमलों का सिलसिला बढ़ने से पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। दरअसल, यमन में हूती विद्रोहियों और सरकारी बलों के बीच हालिया लड़ाई तेज हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक हूती लड़ाकों ने लाल सागर के तट और बाब-अल-मंदेब के आसपास रणनीतिक इलाकों में अपनी पकड़ को मजबूती से बढ़ाई है।
इसके बाद सऊदी अरब ने हूती हमलों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। आपको बता दें कि इस संघर्ष का असर सिर्फ यमन और सऊदी अरब तक सीमित नहीं है। बाब-अल-मंदेब और होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के अहम समुद्री और ऊर्जा मार्गों में शामिल हैं। इन इलाकों में तनाव बढ़ने से तेल की आपूर्ति, जहाजों की आवाजाही और वैश्विक व्यापार पर भी दबाव बढ़ने की काफी आशंका है। इसी बीच 16 सितंबर को सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि उसने मक्का के पास एक हूती ड्रोन को मार गिराया। हूती पक्ष ने सऊदी के दावे से साफ इनकार करते हुए कहा है कि उसने मक्का या किसी धार्मिक स्थल को निशाना नहीं बनाया। बता दें कि अब पश्चिम एशिया का मौजूदा संकट अब कई मोर्चों से जुड़ता जा रहा है। इसमें ईरान-अमेरिका संघर्ष, यमन में हूती लड़ाई और सऊदी अरब पर हमले शामिल हैं। इसके साथ ही गाजा, इराक और लेबनान से जुड़े तनाव भी क्षेत्रीय सुरक्षा की तस्वीर को और बना मुश्किल बना रहे हैं।
इस संघर्ष में सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि यह मामला बढ़ता है तो इसका असर मध्य-पूर्व की सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा और समुद्री व्यापार पर भी पड़ सकता है। फिलहाल क्षेत्रीय देशों की कोशिश बढ़ते तनाव को रोकने और समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखने की है।