Raksha Bandhan 2026 : रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त को पर्व मनाया जाना है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उसकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं। जिसके लिए बाजार में तरह-तरह की पर्यावरण-अनुकूल यानी ईको-फ्रेंडली राखियों (Eco-friendly Rakhis) की मांग काफी बढ़ गई है। ये राखियां न केवल आपके भाई की कलाई की शोभा बढ़ाती हैं, बल्कि हमारे पर्यावरण को भी नुकसान से बचाती हैं। प्लास्टिक, केमिकल और सिंथेटिक धागों से बनी पारंपरिक राखियों के विपरीत, इन्हें पूरी तरह से प्राकृतिक और नष्ट होने वाली (biodegradable) सामग्रियों से तैयार किया जाता है।
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प्लांटेबल या सीड राखी (Plantable / Seed Rakhi)
इन राखियों के भीतर तुलसी, टमाटर, मिर्च या फूलों के बीज डाले जाते हैं। त्योहार के बाद इन्हें मिट्टी में बोने से नया पौधा उग आता है।
जूट और सूती धागे की राखी
इसमें सिंथेटिक रिबन की जगह कच्चे सूत, मोली या जूट के धागों का उपयोग किया जाता है।
मिट्टी और गोबर की राखी
पारंपरिक रूप से शुद्ध मानी जाने वाली गाय के गोबर और पवित्र मिट्टी से तैयार कलाकृतियों का उपयोग करके इन्हें सुंदर रूप दिया जाता है।
अनाज और दालों की राखी
चावल, गेहूं, धान की बालियों और रंग-बिरंगी दालों को मिलाकर बनाई गई बेहद आकर्षक और पारंपरिक राखियां।