नई दिल्ली। भारत में अप्रैल माह के अंतिम दिनों में जमीन से लेकर आसमान तक गर्मी आग उगल रही हैं। दुनिया में भीषण गर्मी के मैप पर भारत बिल्कुल लाल रंग में केंद्र में बना हुआ है। इस समय स्थिति यह है कि रियल-टाइम ग्लोबल तापमान रैंकिंग के अनुसार दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में से 95 शहर अकेले भारत के हैं। पूरा देश झुलस रहा है और गर्मी की लिस्ट में अफ्रीका से लेकर मिडिल ईस्ट तक के देशों को भी पछाड़ दिया है। आखिर देश में ऐसी नौबत क्यों आ गई, आइए समझते हैं।
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भारत में गर्मी को लेकर AQI.in से मिले आंकड़े उपमहाद्वीप के एक बड़े हिस्से में चल रही लू की तीव्रता और विस्तार को दर्शाते हैं। देशभर के कई इलाकों में अप्रैल में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है। इसमें मध्य भारत से लेकर गंगा के मैदानी इलाकों तक के दर्जनों शहर शामिल हैं। देश के कई जगह ऐसे हैं, जहां पारा 45°C के करीब है।
https://www.aqi.in/weather/in/live-ranking
इस सूची में ना केवल भारत के बड़े महानगर बल्कि छोटे कस्बे भी शामिल हैं, जो यह दिखाता है कि लू की स्थिति कितना व्यापक और गहरा रूप ले चुकी है। सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में महाराष्ट्र, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और ओडिशा शामिल हैं। इन राज्यों के कई शहर ग्लोबल ‘टॉप 100’ की सूची में प्रमुखता से दर्ज हैं। सबसे गर्म टॉप-20 में से 19 शहर भारत के ही हैं।
वार्म नाइट्स बढ़ा रही दिक्कत
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इसके साथ ही रात की गर्मी सबसे चिंताजनक बनी हुई है। इससे रात के समय भी तापमान अधिक रहने के कारण वातावरण को ठंडा होने का समय नहीं मिल पा रहा है। इसको वार्म नाइट्स कहा जाता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कई क्षेत्रों में हीटवेव की चेतावनी जारी की है और कहा है कि आने वाले कुछ दिनों तक स्थिति ऐसी ही बनी रहने की संभावना है।
अर्बन हीट आइलैंड की गंभीर समस्या
जलवायु परिवर्तन और गर्म होते जा रहे शहरी इलाके भी गर्मी की चिंता को और बढ़ा रहे हैं। भारत के शहर अर्बन हीट आइलैंड का रूप लेते जा रहे हैं। मुंबई के साथ ही दिल्ली, गुरुग्राम, लखनऊ, कानपुर, बेंगलुरु, कटक, जयपुर, भोपाल जैसे शहर तेजी से चपेट में आ रहे हैं। ऊंची इमारतें और सीमेंट, कंक्रीट के घर गंभीर रूप लेते जा रहे हैं। शहरों में बने घर कंक्रीट, डामर और कांच दिन भर गर्मी सोखते हैं और रात में इसे धीरे-धीरे छोड़ते हैं। मकान की छतें भी सीमेंट की बनी होती हैं।
पिछले एक दशक में भारत के शहरों में वार्म नाइट्स में 32 फीसदी का इजाफा हो चुका है। पिछले साल 2025 में ही फरवरी खत्म होते-होते रात का तापमान बढ़ गया था। अधिकतर जगहों पर 3 से लेकर 5 डिग्री तक बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। बढ़ती गर्मी के फैक्टर पर बात करें तो भारत के 266 जिले बहुत गंभीर गर्मी की कैटिगरी में हैं। वहीं 151 जिले गंभीर और 201 जिले मध्यम कैटिगरी में आ गए हैं।
बढ़ता खतरा और विशेषज्ञों की राय
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गर्मी की ऐसी हालत को लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बार की स्थिति इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह गर्मी किसी एक इलाके तक सीमित न रहकर एक साथ कई राज्यों में फैली हुई है। क्लाइमेट शिफ्ट भी इसकी एक वजह है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे पैटर्न अब अधिक बार देखने को मिल रहे हैं, जो व्यापक जलवायु परिवर्तन और बढ़ते बेसलाइन तापमान की ओर इशारा करते हैं। शहरीकरण का प्रभाव भी अहम है। शहरों में घटता ग्रीन कवर और ‘अर्बन हीट आइलैंड’ प्रभाव भी गर्मी की गंभीरता को बढ़ा रहे हैं।
क्या राहत की है कोई उम्मीद?
भीषण गर्मी के बीच कुछ राहत की उम्मीद भी नजर आ रही है। पूर्वानुमानों के अनुसार अगले कुछ दिनों में पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में गरज के साथ बौछारें और तेज हवाएं चलने की संभावना है, जिससे अस्थायी राहत मिल सकती है। हालांकि, तापमान में बड़ी और स्थायी गिरावट तब तक होने की उम्मीद कम है जब तक कि प्री-मानसून सिस्टम मजबूत नहीं होता या फिर मानसून आगे नहीं बढ़ता है। फिलहाल, भारत दुनिया का सबसे गर्म स्थान बना हुआ है।