जुलाई के महिने में 3 तारीख से शुरू होने वाली 57 दिवसीय वार्षिक श्री अमरनाथ जी की यात्रा वर्ष 2026 के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों और जम्मू-कश्मीर प्रशासन (Central security forces and the Jammu and Kashmir administration) ने सुरक्षा का एक अभेद्य चक्र (Impenetrable Chakravyuha) तैयार किया है।
Amarnath Yatra 2026, श्रीनगर। जुलाई के महिने में 3 तारीख से शुरू होने वाली 57 दिवसीय वार्षिक श्री अमरनाथ जी की यात्रा वर्ष 2026 के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों और जम्मू-कश्मीर प्रशासन (Central security forces and the Jammu and Kashmir administration) ने सुरक्षा का एक अभेद्य चक्र (Impenetrable Chakravyuha) तैयार किया है। इस वर्ष यात्रा मार्ग और मुख्य शिविरों की सुरक्षा को डिजिटल रूप से बेहद मजबूत बनाया गया है, जिसके तहत हर जगह तीखी नजर रखने के लिए 400 से अधिक हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे और 28 वॉच टावर लगाए गए हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद इस बार सुरक्षा में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। पहलगाम और बालटाल दोनों मार्गों पर 360-डिग्री वाले कैमरे संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 400 से भी अधिक लगाए गए हैं। इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एलिवेटेड वॉच टावरों की संख्या पिछले साल की तुलना में 14 से बढ़ाकर इस 28 कर दी गई है।
साथ ही सुरक्षा और हवाई खतरों को देखते हुए पवित्र गुफा और मुख्य मार्गों के आसपास के हवाई क्षेत्र को 3 जुलाई से 28 अगस्त के लिए ‘No-fly zone’ घोषित किया गया है। यहां पर अमरनाथ श्राइन बोर्ड (Shrine Board) और पुलिस प्रशासन इस बार पहचान सत्यापन को लेकर बेहद सख्त हैं, इसलिए यहां के स्थानीय टेंट संचालकों, खच्चर या घोड़े वालों और सेवा प्रदान करने वालों के लिए ‘Pehchan App’ के जरिए क्यूआर कोड आधारित आईडी अनिवार्य कर दी गई है।
इसके अलावा सभी पंजीकृत श्रद्धालुओं को सुरक्षा घेरे के अंदर जाते ही उनकी पल-पल की लोकेशन ट्रैक करने के लिए RFID कार्ड पहनना होगा। खुफिया जानकारी के मुताबिक, इस बार सुरक्षा बलों की तैनाती में भारी बढ़ोतरी की गई है। इस पूरी यात्रा की सुरक्षा के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की लगभग 670 कंपनियों को तैनात की जा रही है। इन कंपनियों में से अकेले 140 कंपनियां अनंतनाग-पहलगाम रूट पर सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगी।
साथ ही बेहद संवेदनशील मोर्चों पर नौसेना के ‘मार्कोस’ Marine Commando (MARCOS) कमांडो और स्थानीय ‘स्नो लेपर्ड्स’ Snow leopard की टीमें तैनात की गई हैं। स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं (Devotees) से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करें और केवल निर्धारित रास्तों का ही चयन करें।