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Rudraksha in Sawan : रुद्राक्ष की महिमा अपार है  , किस्मत चमकाने के लिए सावन में धारण करें रुद्राक्ष

सावन मास को शिव मास कहा जाता है। वहीं शिव पूजा में रुद्राक्ष का विशेष महत्व है। पौराणिक ग्रंथों में रूद्राक्ष की अपार महिमा बतायी गई है।

By अनूप कुमार 
Updated Date

Rudraksha in Sawan : सावन मास को शिव मास कहा जाता है। वहीं शिव पूजा में रुद्राक्ष का विशेष महत्व है। पौराणिक ग्रंथों में रूद्राक्ष की अपार महिमा बतायी गई है।  रुद्राक्ष धारण करने के लिए इस मास को समसे सर्वोत्म समय माना जाता है। मान्यता कि रुद्राक्ष के सटीक प्रयोग से अध्यात्मिक और संसारिक उन्नति होती है। भक्त की साधना और तप में बल और तेज का प्रभाव बढ़ता जाता है। मान्यता के अनुसार, यह भगवान शिव के अश्रु से उत्पन्न हुआ है। यह अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष प्रदान करने में शक्तिशाली है। शिवपुराण, पद्मपुराण, रुद्राक्षकल्प, रुद्राक्ष महात्म्य आदि ग्रंथों में रुद्राक्ष की महिमा का वर्णन किया गया है। रुद्राक्ष के दर्शन, स्पर्श और जप से भी पुण्य प्राप्त होता है।

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ये रुद्राक्ष अड़तीस प्रकार के थे। इनमें कत्थई वाले बारह प्रकार के रुद्राक्षों की सूर्य के नेत्रों से, श्वेतवर्ण के सोलह प्रकार के रुद्राक्षों की चन्द्रमा के नेत्रों से तथा कृष्ण वर्ण वाले दस प्रकार के रुद्राक्षों की उत्पत्ति अग्नि के नेत्रों से मानी जाती है। ये ही इनके अड़तीस भेद हैं।
आइये जानते है कि सावन मास में रुद्राक्ष धारण करने और प्रयोग करने के क्या नियम है।

सोमवार या शिवरात्रि
सावन में रुद्राक्ष धारण करने का सबसे शुभ दिन सोमवार या शिवरात्रि माना जाता है।

पंचामृत स्नान
रुद्राक्ष को धारण करने से पहले गंगाजल या पंचामृत  (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण) से शुद्ध करें। रुद्राक्ष को शुद्ध करने के लिए मंत्र का जाप किया जाता है।
मंत्र
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः।। ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु, ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु।

गंगाजल स्नान

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रुद्राक्ष धारण करने वाले के लिए मांस-मदिरा आदि पदार्थों का सेवन वर्जित होता है।”

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