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Sharad Purnima 2024 : शरद पूर्णिमा की रात इस समय रखें खुले आसमान में खीर , जानें सही समय और विधि

शरद पूर्णिमा के दिन व्रत और पूजा करने के बाद शाम को चंद्रमा के दर्शन की परंपरा है। शरद पूर्णिमा का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व है।

By अनूप कुमार 
Updated Date

Sharad Purnima 2024 : शरद पूर्णिमा के दिन व्रत और पूजा करने के बाद शाम को चंद्रमा के दर्शन की परंपरा है। शरद पूर्णिमा का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार,शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा षोडश कलाओं से युक्त होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी की समुद्र मंथन से उत्पत्ति शरद पूर्णिमा के दिन ही हुई थी।

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इस साल शरद पूर्णिमा के लिए अश्विन शुक्ल पूर्णिमा तिथि 16 अक्टूबर बुधवार की रात 8 बजकर 40 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन 17 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 55 मिनट तक रहेगी। ऐसे में शरद पूर्णिमा का पर्व 16 अक्टूबर बुधवार को मनाया जाएगा।

 शरद पूर्णिमा का पौराणिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी की समुद्र मंथन से उत्पत्ति शरद पूर्णिमा के दिन ही हुई थी। इसलिए इस तिथि को भक्त रात्रि में जागरण करते है और मां लक्ष्मी का पूजन करते हैं। मान्यता है कि मां लक्ष्मी भक्तों पर प्रसन्न हो कर उन पर अपनी कृपा बरसाती हैं और धन-वैभव प्रदान करती हैं।

ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिषीय मान्यता है कि शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा षोडश कलाओं से युक्त होता है। उसकी किरणों से अमृत वर्षा होती है। इस विशेषता के कारण प्रभु श्रीकृष्ण ने इसे रासोत्सव के लिए उपयुक्त माना। शरद पूर्णिमा की सुबह आराध्य देव को श्वेत वस्त्राभूषण से सुसज्जित कर पूजा-अर्चना की जाती है।

चंद्रमा की 16 कलाएं
अमृत, मनदा (विचार), पुष्प (सौंदर्य), पुष्टि (स्वस्थता), तुष्टि( इच्छापूर्ति), ध्रुति (विद्या), शाशनी (तेज), चंद्रिका (शांति), कांति (कीर्ति), ज्योत्सना (प्रकाश), श्री (धन), प्रीति (प्रेम), अंगदा (स्थायित्व), पूर्ण (पूर्णता अर्थात कर्मशीलता) और पूर्णामृत (सुख)।

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रातभर चंद्रमा की रोशनी में खीर रखें
शरद पूर्णिमा का व्रत विधि-विधान तथा पूर्ण श्रद्धा से करने पर माता लक्ष्मी की कृपा होती है। इस दिन सुबह तीर्थ स्नान और दान करना शुभ रहेगा। व्रत और पूजा करने के बाद शाम को चंद्रमा के दर्शन कर कच्चे दूध मिश्रित जल का अर्घ्य दें। सभी देवी-देवताओं को खीर का नैवेद्य लगाएंं। फिर रात भर चंद्रमा की रोशनी में खीर रखें और अगले दिन सुबह खाली पेट खीर को प्रसाद के तौर पर खाएं।

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