Somvati Amavasya 2026 : सनातन धर्म में व्रत उपवास आर दान का विशेष महत्व है। इसी क्रम सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए सोमवती अमावस्या के व्रत का पालन करतीं है। इसके पीछे पौराणिक मान्यता है कि, पीपल के पेड़ की जड़ों में भगवान ब्रह्मा, तने में श्री हरि भगवान विष्णु और उसके ऊपरी भाग में भगवान शिव का वास होता है। इसलिए पीपल की पूजा और परिक्रमा करने से त्रिदेवों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। सुहागिन महिलाएं इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा और उसकी 108 परिक्रमा करतीं है।
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द्रिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिकमास की अमावस्या तिथि 14 जून 2026 दोपहर 12 बजकर 19 मिनट पर शुरु होगी। वहीं इसका समापन 15 जून 2026 को सुबह 08 बजकर 23 मिनट पर होगा।
उदया तिथि
हिंदू धर्म में अधिकांश व्रत और त्योहार उदया तिथि के समय मौजूद तिथि के आधार पर मनाए जाते हैं, क्योंकि 15 जून को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि रहेगी और इस दिन सोमवार भी है इसलिए सोमवती अमावस्या का व्रत और पूजा 15 जून 2026, सोमवार को किया जाएगा।
पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना के लिए पालन किया जाने वाला इस व्रत में कुछ विशेष नियमों का पालन किया जाता है।
पीपल के पेड़ के तने पर कच्चा सूत या मोली का धागा लपेटते हुए 108 बार परिक्रमा करें।भोग और अर्पण: पीपल में जल, रोली, हल्दी, चावल, काले तिल चढ़ाएं और मिष्ठान या बताशे का भोग लगाएं।
क्षमता के अनुसार व्रत
अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार निर्जला (बिना जल का) या फलाहारी (दूध, फल आदि) व्रत रखें।
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इस दिन बाल, दाढ़ी या नाखून कटवाने से बचना चाहिए।