DGCA takes action on IndiGo crisis : इंडिगो फ्लाइट संकट (IndiGO flight crisis) मामले पर डीजीसीए (DGCA) की जांच रिपोर्ट में एयरलाइंस की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। जिस पर डीजीसीए ने इंडिगो के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कुल 22.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। इस बीच, शिवसेना यूबीटी की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने डीजीसीए की इस कार्रवाई पर तंज़ कसा है। उन्होंने कहा कि इंडिगो बोर्ड भी राहत की सांस लेकर हंस रहा होगा।
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राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने रविवार को एक्स पोस्ट में लिखा, “इंडिगो एयरलाइंस द्वारा फैलाई गई भारी अफरा-तफरी, भारत को हुई वैश्विक शर्मिंदगी, एयरलाइन द्वारा अनिवार्य नियमों का उल्लंघन, यात्रियों द्वारा चुकाए गए बढ़े हुए किराए, फंसे हुए हजारों यात्री, भारतीयों पर भावनात्मक, मानसिक और स्वास्थ्य पर पड़े असर, इन सभी को DGCA ने 22 करोड़ रुपये के ‘राजसी राशि’ के जुर्माने के साथ सुलझा दिया। यहां तक कि इंडिगो बोर्ड भी राहत की सांस लेकर हंस रहा होगा। जबकि भारतीय इन भयानक यादों के साथ इस भावना के साथ आगे बढ़ सकते हैं कि ‘हम इन समस्याओं के साथ जीने के लिए पैदा हुए हैं और सरकार से हमारे साथ खड़े होने की उम्मीद नहीं कर सकते’।”
डीजीसीए की जांच रिपोर्ट में क्या कहा गया?
इंडिगो फ्लाइट संकट पर डीजीसीए की रिपोर्ट में कहा है कि एयरलाइन मैनेजमेंट समय रहते योजना की खामियों को पहचानने में नाकाम रहा। पर्याप्त ऑपरेशनल बफर (Operational buffer) नहीं रखा गया और संशोधित उड़ान ड्यूटी नियमों को ठीक से लागू नहीं किया गया। इंडिगो का पूरा फोकस क्रू, फ्लाइट और नेटवर्क संसाधनों के अधिकतम इस्तेमाल पर था। इससे रोस्टर बफर काफी कम हो गया। क्रू रोस्टर (Crew Roster) इस तरह बनाए गए कि ड्यूटी समय को अधिकतम खींचा जा सके। इसका नतीजा यह हुआ कि बड़ी संख्या में उड़ानें लेट हुईं और रद्द करनी पड़ीं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
डीजीसीए ने इस मामले में इंडिगो पर जुर्माना लगाने के अलावा, एयरलाइन को 50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी भी जमा करने को कहा है। इसके साथ ही सीनियर वाइस प्रेसिडेंट को ऑपरेशनल जिम्मेदारियों से हटाने और भविष्य में किसी भी जवाबदेह पद पर नियुक्त न करने के निर्देश दिए गए हैं।