लखनऊ। आम आदमी पार्टी (AAP) के उत्तर प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh) ने उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित ‘68,500 सहायक शिक्षक भर्ती’ और ‘69,000 सहायक अध्यापक भर्ती’ में आरक्षण विसंगतियों और अभ्यर्थियों के शोषण को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) को दो अलग-अलग पत्र लिखे हैं। सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh) ने पत्रों के माध्यम से प्रदेश सरकार से राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुतियों को तत्काल लागू करने और सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में आगामी सुनवाई के दौरान अभ्यर्थियों के पक्ष में सकारात्मक रुख अपनाते हुए नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने की पुरजोर मांग की है।
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पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति अनुसार ओबीसी अभ्यर्थियों को मिले 5 फीसदी की छूट
मुख्यमंत्री को भेजे गए पहले पत्र (पत्रांक: OTML/2026/22514) का हवाला देते हुए सांसद संजय सिंह ने कहा कि 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2018 के ओबीसी एवं दिव्यांग अभ्यर्थी लंबे समय से अपने न्यायसंगत अधिकारों के लिए भटक रहे हैं। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने अपनी पूर्व संस्तुति (05.01.2022) को बरकरार रखते हुए 16 जून 2026 की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया था। इसके बाद 9 जुलाई 2026 को प्रमुख सचिव (बेसिक शिक्षा) को संस्तुति भेजी गई कि ओबीसी अभ्यर्थियों को 150 पूर्णांक में से 60 अंक (अर्थात 40 प्रतिशत) प्राप्त करने पर उत्तीर्ण माना जाए और उसी अनुसार परीक्षा परिणाम संशोधित कर नियुक्ति दी जाए।
संजय सिंह (Sanjay Singh) ने कहा कि अभ्यर्थियों के अनुसार भर्ती में लगभग 23,000 पद खाली हैं, जिनमें अकेले ओबीसी वर्ग के लगभग 9,000 पद रिक्त हैं। इसके बावजूद बेसिक शिक्षा विभाग (Basic Education Department) द्वारा 7 वर्ष का समय बीत जाने का बहाना बनाकर अभ्यर्थियों को इस लाभ से वंचित किया जा रहा है, जो कि पूरी तरह से असंवैधानिक है।
संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 का उल्लंघन कर रही सरकार
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सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh) ने योगी सरकार (Yogi Government) पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि खुद बेसिक शिक्षा विभाग ने स्वीकार किया है कि सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा-2019 एवं प्रधानाध्यापक भर्ती-2021 में ओबीसी अभ्यर्थियों को 5% की छूट प्रदान की गई है। ऐसे में केवल 68,500 भर्ती परीक्षा-2018 के अभ्यर्थियों को इस अधिकार से वंचित रखना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत मिले ‘समानता के अधिकार’ का सीधा उल्लंघन है। विभाग की हीलाहवाली का दंड योग्य और पात्र अभ्यर्थियों को नहीं दिया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट में 16 सितंबर को सकारात्मक हलफनामा दाखिल करे सरकार
मुख्यमंत्री को लिखे दूसरे पत्र (पत्रांक: OTML/2026/22515) में सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh) ने 69,000 सहायक अध्यापक भर्ती में आरक्षण विसंगति के कारण पीड़ित ओबीसी और एससी वर्ग के अभ्यर्थियों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। संजय सिंह ने कहा कि शासन द्वारा 5 जनवरी 2022 को जारी की गई 6,800 आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की सूची आज तक अधर में लटकी है। इस प्रकरण में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में आगामी 16 सितंबर 2026 (डायरी संख्या: 38554/2024) को अहम सुनवाई होनी है।
संजय सिंह (Sanjay Singh) ने मुख्यमंत्री से मांग की कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में मामले की पैरवी कर रहे अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से स्पष्ट और सकारात्मक विधिक पक्ष रखे। उन्होंने पत्र में अभ्यर्थियों के सुझाव का समर्थन करते हुए कहा कि यदि 6,800 अभ्यर्थियों की नियुक्ति तत्काल विधिक रूप से संभव न हो, तो बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामे में दर्शाए गए 4,946 रिक्त पदों पर मेरिट डाउन कर ओबीसी और एससी अभ्यर्थियों का समायोजन किया जाए। साथ ही, इन अभ्यर्थियों की नियुक्ति 1 जून 2020 से प्रभावी मानी जाए ताकि सेवा और वरिष्ठता के स्तर पर उनके हितों की पूरी सुरक्षा हो सके।
दलित और पिछड़े युवाओं का हक मारना बंद करे सरकार
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सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh) ने कहा कि उत्तर प्रदेश का युवा वर्षों से सड़कों पर लाठियां खा रहा है और भाजपा सरकार संवैधानिक संस्थाओं के आदेशों की भी धज्जियां उड़ा रही है। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (State Backward Classes Commission) के स्पष्ट आदेशों के बावजूद बेसिक शिक्षा विभाग (Basic Education Department) कुंडली मारकर बैठा है। आम आदमी पार्टी इन पीड़ित शिक्षक अभ्यर्थियों की लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक लड़ेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि वे बेसिक शिक्षा विभाग (Basic Education Department) को तत्काल कड़े दिशा-निर्देश जारी करें ताकि लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे योग्य युवाओं को अविलंब नियुक्ति और न्याय मिल सके।