नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (US President Donald Trump) ने भारत और चीन को हेल होल (नरक का द्वार) बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक चिट्ठी पोस्ट की है, जिसमें जन्म के आधार पर नागरिकता देने की आलोचना करके भारत-चीन समेत कई देशों पर विवादित टिप्पणी की । डोनॉल्ड ट्रंप (Donald Trump) की ये बात बेहद अपमानजनक है और भारत विरोधी है। हर भारतीय इससे आहत हैं। इस बात के लिए पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) से बात करनी चाहिए और कड़ी आपत्ति दर्ज करानी चाहिए।
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"अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत को 'नरक' बताया है"
– ये बात बेहद अपमानजनक है और भारत विरोधी है। हर भारतीय इससे आहत है।
इस बात के लिए PM मोदी को अमेरिका के राष्ट्रपति से बात करनी चाहिए और कड़ी आपत्ति दर्ज करानी चाहिए।
हालांकि, जिस हिसाब का मोदी का ट्रैक-रिकॉर्ड रहा है, ऐसे… pic.twitter.com/a65R8ejI4x
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— Congress (@INCIndia) April 23, 2026
यह बात कांग्रेस पार्टी ने अपने अधिकारिक एक्स पर लिखकर कही है। पार्टी ने लिखा कि हालांकि, जिस हिसाब का पीएम नरेंद्र मोदी का ट्रैक-रिकॉर्ड रहा है, ऐसे में यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि मोदी, ट्रंप के आगे कुछ बोल पाएंगे। कांग्रेस पार्टी ने कहा कि ट्रंप लगातार भारत के लिए अपमानजनक बातें करते हैं और मोदी चुपचाप सुनते हैं। नरेंद्र मोदी एक कमजोर प्रधानमंत्री हैं और इसका खामियाजा पूरा देश भुगत रहा है।
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने बड़बोलेपन और बदजुबानी के लिए अक्सर विवादों में रहते हैं। इस बार उन्होंने जन्मजात नागरिकता को लेकर दिये एक बयान में भारत और चीन जैसे देशों को नरक बताया है। दरअसल, ट्रंप ने जन्मजात नागरिकता को लेकर एक लेटर शेयर किया है। जिसमें भारत और चीन जैसे देशों को लेकर अमर्यादित टिप्पणी की गयी है।
जन्मजात नागरिकता पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर जो लेटर शेयर किया है। उसके एक पैरा में लिखा है- “यहां एक बच्चा तुरंत नागरिक बन जाता है, और फिर वे पूरे परिवार को चीन या भारत या दुनिया की किसी और नरक से ले आते हैं। यह देखने के लिए आपको ज़्यादा दूर जाने की ज़रूरत नहीं है। यहाँ अब इंग्लिश नहीं बोली जाती। आज आने वाले इमिग्रेंट क्लास में इस देश के लिए लगभग कोई लॉयल्टी नहीं है, जो हमेशा से नहीं था। नहीं, वे आज के यूरोपियन अमेरिकन्स और उनके पुरखों जैसे नहीं हैं।”
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पत्र की शुरुआत में लिखा गया- “सैवेज नेशन में आपका स्वागत है। आज की छोटी, छोटी चर्चा उन दलीलों के बारे में होगी जो मैंने अभी सुप्रीम कोर्ट में बर्थराइट सिटिजनशिप के बारे में सुनीं। दलीलें सुनकर मुझे थोड़ा गुस्सा आया क्योंकि मैंने बस कानूनी बातें सुनीं जो आगे-पीछे हो रही थीं, और मुझे यह बात साफ़ तौर पर समझ आई कि अमेरिका में अवैध विदेशियों की बाढ़ लाने और डेमोग्राफिक्स को हमेशा के लिए बदलने के पक्ष में दलीलें देने वाला व्यक्ति एक चीनी अमेरिकी था जो मुझे क्लासिक ACLU वकील जैसा लगता है। बहुत चालाक, बहुत बुरा, और बहुत चालाक। ACLU साँप का सिर है। वे हमेशा से रहे हैं, और वे फिर से अमेरिका को एक गंदे पानी के गड्ढे में बदलने की कोशिश कर रहे थे।”
आगे लिखा है- “हम सब जानते हैं कि ये दलीलें कोर्टरूम के एब्स्ट्रैक्ट में नहीं होनी चाहिए। यह असल में कानून के बारे में नहीं है। यह पब्लिक ओपिनियन के बारे में है। अब, मैं खुद कॉन्स्टिट्यूशन के बारे में बहस करना शुरू कर सकता हूँ, और मैं आपके साथ एक पत्थर की दीवार से टकरा जाऊँगा। हम कॉन्स्टिट्यूशन में बदलाव नहीं कर सकते क्योंकि यह पत्थर पर लिखा है, और अगर हम ऐसा करते हैं, तो वे हमारा पहला और दूसरा अमेंडमेंट हटा देंगे, जो वे करेंगे। तो यही प्रॉब्लम है। कॉन्स्टिट्यूशन हवाई यात्रा से पहले लिखा गया था, कहने की ज़रूरत नहीं, टेलीविज़न से पहले, इंटरनेट से पहले, रेडियो से पहले, और आप कह सकते हैं, ये कुछ तर्क कितने रेलिवेंट हैं जब लोग अपनी प्रेग्नेंसी के नौवें महीने में हवाई जहाज़ से यहाँ आ रहे हैं।”