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Video : ‘लोकतंत्र की हत्या है, लोकतंत्र की हत्या है… ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’ जानें कौन है जिसको गोद में लेकर भागी यूपी पुलिस?

By santosh singh 
Updated Date

लखनऊ। यूपी चुनाव 2027 (UP Elections 2027) को देखते हुए मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर जारी घमासान अब सड़कों पर भी उग्र रूप लेता दिखाई दे रहा है। यूपी की राजधानी  राजधानी लखनऊ के ऐतिहासिक और प्रशासनिक रूप से बेहद संवेदनशील हजरतगंज चौराहे पर उस वक्त ड्रामा और नारेबाजी का माहौल बन गया, जब समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar) के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सड़कों पर उतर आए, लेकिन इस पूरे प्रदर्शन के दौरान एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

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हजरतगंज चौराहे पर सपा कार्यकर्ताओं के उग्र प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए जब भारी पुलिस बल पहुंचा, तो वहां एक अनोखा वाकया हुआ। छोटे कद के अधेड़ कार्यकर्ता का तीखा तेवर देखकर सब दंग रह गए। प्रदर्शनकारियों के बीच एक छोटे कद के अधेड़ सपा कार्यकर्ता अपने पूरे जोश में चिल्ला रहे था ‘लोकतंत्र की हत्या है, लोकतंत्र की हत्या है… ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’। उनके हाथ में एक बड़ा पोस्टर था, जिस पर लिखा था: ‘गुस्से में है सारा देश, इस्तीफा दे दो ज्ञानेश!’

जब पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर पुलिस बस में बैठाना शुरू किया, तो भीड़ के बीच एक दारोगा सब इंस्पेक्टर ने उन अधेड़ सपा कार्यकर्ता को किसी बच्चे की तरह गोद में उठा लिया और दौड़ते हुए बस की तरफ ले गए। गोद में उठाए जाने के बाद भी उस कार्यकर्ता के तेवर ढीले नहीं पड़े और वे लगातार मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे और लोकतंत्र बचाने के नारे हवा में हाथ लहराकर लगाते रहे।

दिल्ली के रामलीला मैदान से लखनऊ के हजरतगंज तक हंगामा

लखनऊ की हजरतगंज चौराहे पर हुआ यह प्रदर्शन कोई एकाएक हुई घटना नहीं है, बल्कि विपक्षी दलों के राष्ट्रीय स्तर पर जारी अभियान की अगली कड़ी है। रविवार को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में विपक्षी गठबंधन और समाजवादी पार्टी ने चुनाव आयोग व मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ ‘संविधान और लोकतंत्र बचाओ’ महारैली की थी।

2027 के यूपी रण से पहले चुनावी माहौल गर्म

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दिल्ली के रामलीला मैदान में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जो सुर बुलंद किए गए थे, अब सपा कार्यकर्ता उसे उत्तर प्रदेश के हर जिले और चौराहे तक ले जाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मतदाता सूची से पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वोटों के कथित नाम काटे जाने के मुद्दे को सपा बड़ा राजनीतिक हथियार बना रही है।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार यह आरोप लगाते आ रहे हैं कि स्थानीय स्तर पर चुनाव प्रशासन की मिलीभगत से मतदाता सूचियों में हेरफेर की कोशिशें हो रही हैं। हजरतगंज चौराहे पर प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं का कहना था कि जब तक चुनाव प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता नहीं आ जाती और मुख्य निर्वाचन आयुक्त अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक उनका यह आंदोलन थमेगा नहीं। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और पुलिस प्रशासन का कहना है कि सपा अपनी हार के डर से पहले से ही संवैधानिक संस्थाओं और चुनाव आयोग पर अनर्गल आरोप लगाकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रही है।

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