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अल्जाइमर और नींद का क्या है कनेक्शन? वैज्ञानिकों की रिसर्च ने खोला चौंकाने वाला राज

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ केंटकी के शोधकर्ताओं की एक रिसर्च ने अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारी और नींद के बीच संबंध को लेकर नई संभावनाएं सामने रखी हैं। अल्जाइमर जैसी स्थिति वाले चूहों पर वैज्ञानिकों ने प्रयोग किया, जिसमें दिमाग की विशेष प्रतिरक्षा कोशिकाओं की संख्या कम करने के बाद उनकी नींद में रिकॉर्ड स्तर पर वृद्धि देखी गई।

By Sushil Sah 
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अमेरिका। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ केंटकी के शोधकर्ताओं की एक रिसर्च ने अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारी और नींद के बीच संबंध को लेकर नई संभावनाएं सामने रखी हैं। अल्जाइमर जैसी स्थिति वाले चूहों पर वैज्ञानिकों ने प्रयोग किया, जिसमें दिमाग की विशेष प्रतिरक्षा कोशिकाओं की संख्या कम करने के बाद उनकी नींद में रिकॉर्ड स्तर पर वृद्धि देखी गई।

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चूहों की नींद दो घंटे से ज्यादा बढ़ी

शोधकर्ताओं ने इस प्रयोग में माइक्रोग्लिया नाम की कोशिकाओं पर विशेष ध्यान दिया। ये कोशिकाएं दिमाग की प्रतिरक्षा प्रणाली का हिस्सा हैं। यह क्षतिग्रस्त कोशिकाओं तथा नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों को नष्ट करने में काफी मदद करती हैं।

शोधकर्ताओं ने ‘Pexidartinib’ नाम की दवा का इस्तेमाल किया, जो माइक्रोग्लिया के जीवित रहने से जुड़े संकेतों को रोकती है। करीब 14 दिनों तक प्रयोग करने के बाद चूहों के दिमाग में माइक्रोग्लिया की संख्या लगभग 87 प्रतिशत कम हो गई। साथ ही उनकी नींद प्रतिदिन दो घंटे से ज्यादा बढ़ गई।

एमिलॉयड प्लाक में नहीं आई कमी

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इस रिसर्च का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि नींद बढ़ने के बावजूद भी चूहों के दिमाग में एमिलॉयड प्लाक की मात्रा कम नहीं हुई। बता दें कि एमिलॉयड प्लाक प्रोटीन के ऐसे जमाव हैं, जिनका संबंध अल्जाइमर से पाया गया है।

शोध के परिणाम ये संकेत देते हैं कि अल्जाइमर में नींद से जुड़ी समस्याओं का संबंध केवल एमिलॉयड प्लाक से नहीं, बल्कि माइक्रोग्लिया की गतिविधियों और दिमाग में सूजन पैदा करने वाली प्रक्रियाओं से भी हो सकता है। शोधकर्ताओं ने नींद के पैटर्न में भी बदलाव देखा, जिसमें Non-rapid eye movement (NREM) नींद के लंबे दौर शामिल थे।

क्या इंसानों में भी अल्जाइमर का इलाज संभव है?

फिलहाल इस रिसर्च को अल्जाइमर का इलाज समझना जल्दबाजी होगी। यह प्रयोग अभी सिर्फ चूहों पर किया गया है। इंसानों में इसकी प्रभावशीलता तथा सुरक्षा साबित होना बाकी है। आपको बता दें कि माइक्रोग्लिया दिमाग की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती हैं, इसलिए उनकी संख्या कम करने से जुड़े किसी भी उपचार का सावधानीपूर्वक अध्ययन बेहद जरूरी है।

फिर भी यह रिसर्च अल्जाइमर और नींद के बीच संबंध को समझने की दिशा में नई जानकारी देती है। यदि भविष्य में इंसानों पर होने वाले अध्ययनों में भी बिल्कुल ऐसे ही नतीजे देखने को मिलते हैं, तो नींद से जुड़ी समस्याओं के उपचार के नए रास्ते खुल सकते हैं।

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